नागपुर में भव्यउपधान तप आराधना

उपधान का कर्मो का बंधन तोड़े :- विश्वरत्न सागर


नागपुर  :-
महानगर के मध्य श्री सुमतिनाथ स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, रामदास पेठ के पावन प्रांगण में भव्य उपधान तप आराधना का आयोजन नागपुर शहर में गुरु नवरत्न कृपाप्राप्त  युवा हृदय सम्राट,जिनशासन हितचिंतक, 38 उपधान तप के मार्गदर्शक परम पूज्य आचार्य देव श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वरजी म. सा.आदिं ठाणा व साध्वी श्री सौम्यरेखा श्रीजी म. सा.आदि श्रमण–श्रमणी भगवंतों की पावन निश्रा एवं मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

संघ के अनुसार प्रथम प्रवेश 21 अक्टूबर व दृतिय प्रवेश 23 अक्टूबर को होगा।आचार्य विश्वरत्न सागरजी ने बताया कि उपधान तप के अगणित लाभ,उपधान केवल एक तप नहीं यह तो सामायिक, नवकार जाप, पौषध, काउस्सग्ग, उपवास, आयंबिल, नीवी, पच्चखाण एवं सूत्र-पाठ जैसी अनेक आराधनाओं का अद्भुत समन्वय है। एक नजर में उपधान की विराट आराधना में

🌿 47 दिन पौषध

🪷 1410 सामायिक

📿 1,01,520 नवकार जाप

🔥 21 उपवास

🌾 10 आयंबिल

🌱 16 नीवी

🕉️ 100-100 लोगस्स के काउस्सग्ग

📖 इरियावहीय सूत्र का पाठ

🙏 47 दिनों का पच्चखाण

🌺 1. 1410 सामायिक की आराधना 🌺

47 दिन × 30 सामायिक =1410 सामायिक

परंपरागत मान्यता के अनुसार,

एक सामायिक का पुण्य 72 हजार अरब मन सोना सात क्षेत्र में उपयोग करने के बराबर बताया गया है।अर्थात् 1410 सामायिक से10 करोड़ अरब 15 लाख 20 हजार अरब मन सोना सात क्षेत्र में उपयोग करने के बराबर लाभ प्राप्त होने की मान्यता है।उन्होंने कहा कि

🌺 2. सामायिक से देव-आयुष्य का शुभ बंध 🌺

एक सामायिक से 92,59,25,925 पल्योपम प्रमाण देव-लोक के आयुष्य का शुभ बंध होने की मान्यता है।1410 सामायिक से 13,05,55,55,54,250 पल्योपम देव-लोक के आयुष्य का शुभ बंध बताया गया है।इसके अलावा 📿 3. 1,01,520 नवकार जाप 📿एक नवकार गिनने से 400 सागरोपम जितने अशुभ कर्मों के नाश का फल बताया गया है।उपधान में प्रत्येक आराधक 1,01,520 नवकार गिनता है।अर्थात् एक उपधान से 5,07,60,000 करोड़ सागरोपम जितने अशुभ कर्मों के नाश का फल बताया गया है।साथ ही परंपरागत मान्यता में16,75,080 करोड़ बार सातवीं नारकी के कर्मों को तोड़ने का उल्लेख मिलता है।🌸 4. नवकार जाप से देव-आयुष्य 🌸एक नवकार से2 लाख 65 हजार पल्योपम देव-लोक के आयुष्य का बंध बताया गया है।1,01,520 नवकार से 26,90,28,00,000 पल्योपम देव-आयुष्य का शुभ बंध बताया गया है।🕉️ 5. लोगस्स के काउस्सग्ग 🕉️उपधान में 47 दिनों तक100-100 लोगस्स के काउस्सग्ग की आराधना होती है।परंपरागत फलश्रुति के अनुसार✨ 61,35,21,000 पल्योपम देव-आयुष्य के शुभ बंध का फल बताया गया है।📖 6. इरियावहीय सूत्र का पाठ 📖 एक बार इरियावहीय सूत्र का पाठ करने से 88,000 स्वर्ण की 500 धनुष प्रमाण बड़ी प्रतिमा भरवाने के बराबर लाभ प्राप्त होने की परंपरागत मान्यता है।🔥 7. 21 उपवास 🔥उपधान तप में आने वाले 21 उपवास करने से✨ 21 लाख करोड़ वर्ष के अशुभ कर्मों के नाश का फल बताया गया है।🌾 8. 10 आयंबिल 🌾उपधान में आने वाले 10 आयंबिल करने से—✨ 10 हजार करोड़ वर्ष के अशुभ पापों के नाश का फल बताया गया है।🌱 9. 16 नीवी 🌱उपधान में आने वाली 16 नीवी से✨ 16 करोड़ वर्ष के अशुभ कर्मों के नाश का फल बताया गया है।🙏 10. 47 दिनों का पच्चखाण 🙏उपधान के 47 दिनों के परिमुह पच्चखाण से✨ 47 लाख वर्ष के अशुभ पापों के नाश का फल बताया गया है।🪷 उपधान आखिर है क्या? 🪷उपधान केवल उपवास नहीं।उपधान केवल तपस्या नहीं।उपधान केवल 47 दिनों की साधना नहीं बल्कि...

🌿 पौषध का अनुशासन

🪷 सामायिक की साधना

📿 नवकार की आराधना

🕉️ काउस्सग्ग की एकाग्रता

🔥 उपवास का तप

🌾 आयंबिल का संयम

 नीवी की मर्यादा

 पच्चखाण का संकल्प

📖 सूत्र-अध्ययन का ज्ञान

इन सभी का अद्भुत आध्यात्मिक समन्वय है।“तप तन को नहीं,

आत्मा को जागृत करने की साधना है।”“कुछ दिन संसार से विराम लेकर,

आइए... अपनी आत्मा के पास चलते हैं।” उपधान तप — आत्मशुद्धि की ओर एक दिव्य कदम 


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