रसहीन स्वाद का नाम हैं आयंबिल
ओलिजी का प्रारंभ
प्रस्तुति :- सीए राकेश रांका
फल नहीं, ड्रायफ्रूट नहीं, एक्स्ट्रा की तो छूट नहीं, इसका नाम आयंबिल।
मावा-मिठाई का नाम नहीं, हरी सब्जी का काम नहीं, शरबत का कोई जाम नहीं, इसका नाम आयंबिल।
मिर्च और हल्दी नहीं, राई-जीरा-धनिया नहीं, वेफर-मूंगफली नहीं, इसका नाम आयंबिल।
दालचीनी या लौंग नहीं, इलायची या जायफल नहीं, नारियल का पानी नहीं, इसका नाम आयंबिल।
दूध और घी नहीं, गुड़ और शक्कर नहीं, नाश्ता-अचार-कुछ नहीं, इसका नाम आयंबिल।
तेल और छाछ नहीं, दही की कोई आस नहीं, पान-मावा-मुखवास नहीं, इसका नाम आयंबिल।
सुआ या सौंफ नहीं, सुपारी-धनादल नहीं, जीरा गोली की झंझट नहीं, इसका नाम आयंबिल।
छुंदो और मुरब्बा नहीं, अचार की कोई बात नहीं, तले हुए की कोई जात नहीं, इसका नाम आयंबिल।
एक टाइम प्रेम से खा लो, पेट भर लो, रसना को दबा लो, इसका नाम आयंबिल।
पेट को भाड़ा मिले, जीभ भले तड़पे, स्वाद की तो बला टले, इसका नाम आयंबिल।
भोजन बहुत सात्विक है, विचार भी तात्विक हैं, यह बात पूरी तार्किक है, समझ गए यह है आयंबिल।

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