प्रदीप कुमार जैन : पत्रकारिता का राष्ट्रीय विश्वास, प्रेस काउंसिल में पुनः दायित्व
दैनिक विश्व परिवार के 50वें स्वर्णिम वर्ष में हार्दिक बधाई
राजेन्द्र जैन महावीर
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,जैन पत्रकार महासंघ
पत्रकारिता में पद मिलना उपलब्धि हो सकती है, लेकिन वर्षों तक विश्वास अर्जित करना और उसे बनाए रखना ही किसी पत्रकार की वास्तविक पूंजी है। श्री प्रदीप कुमार जैन की पत्रकारिता यात्रा इसी विश्वास, संस्कार और निरंतर कर्मशीलता की कहानी है। राष्ट्रीय स्तर पर राजा श्रेयांस पत्रकारिता पुरस्कार, से सम्मानित श्री जैन का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में पुनः सदस्य मनोनयन उनकी दीर्घ पत्रकारिता साधना और सामाजिक सरोकारों की राष्ट्रीय स्वीकृति है। 7 अक्टूबर 2026 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के माध्यम से उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है कि जिस ‘दैनिक विश्व परिवार’ की पत्रकारिता परंपरा से श्री प्रदीप कुमार जैन जुड़े हैं, वह स्वयं अब अपनी यात्रा के स्वर्णिम वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वर्ष 1976 में झांसी से स्वर्गीय श्री कैलाशचंद जी द्वारा स्थापित ‘दैनिक विश्व परिवार’ ने पांच दशकों की यात्रा में पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। आज यह समाचार-पत्र झांसी और रायपुर दोनों स्थानों व दो राज्यों से प्रकाशित हो रहा है। स्वर्णिम वर्ष के अवसर पर परिवार की इस गौरवपूर्ण पत्रकारिता परंपरा के प्रतिनिधि श्री प्रदीप कुमार जैन का राष्ट्रीय पत्रकारिता के सर्वोच्च संस्थागत मंचों में से एक प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में पुनः दायित्व प्राप्त करना निश्चित ही एक विशेष और गौरवपूर्ण संयोग है।
‘विश्व परिवार’—नाम में ही एक व्यापक दृष्टि
विश्व परिवार केवल एक समाचार-पत्र का नाम नहीं, बल्कि एक विचार और जीवन-दृष्टि है। इसमें ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ प्राणीमात्र के कल्याण का व्यापक संदेश निहित है। ऐसे समय में जब पत्रकारिता में नकारात्मकता और सनसनी की प्रवृत्तियां अक्सर चर्चा में रहती हैं, दैनिक विश्व परिवार ने सकारात्मक, रचनात्मक और समाज को जोड़ने वाली पत्रकारिता को अपनी विशिष्ट पहचान बनाया है।
इस परंपरा की नींव रखने वाले स्वर्गीय श्री कैलाशचंद जी स्वयं पत्रकारिता के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे और उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष ,नगर पालिका झांसी के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर चुके थे। परिवार की पत्रकारिता यात्रा को आगे बढ़ाने में उनके पुत्रों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। स्वर्गीय श्री प्रवीण कुमार जैन ने झांसी संस्करण में लगभग 15 वर्षों तक संपादक के रूप में अपनी सेवाएं देकर समाचार पत्र को विशेष ऊंचाइयां दीं और सामाजिक क्षेत्र में भी आपने विशिष्ट कार्य किए । उनके आकस्मिक निधन से पत्रकारिता का समाज सेवी चेहरा चिर निद्रा में विलीन हो गया ।
वर्तमान में श्री प्रदीप कुमार जैन झांसी के प्रधान संपादक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रायपुर से भी दैनिक विश्व परिवार का प्रकाशन निरंतर जारी है।
इस प्रकार पांच दशक की यह यात्रा केवल एक समाचार-पत्र की यात्रा नहीं, बल्कि एक परिवार द्वारा पत्रकारिता के मूल्यों, संस्कारों और सामाजिक दायित्व को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की कहानी है।
संस्कारों से शुरुआत, अध्ययन से विस्तार
1 मार्च 1962 को जन्मे श्री प्रदीप कुमार जैन ने हिन्दी, अंग्रेजी एवं राजनीति शास्त्र में एम.ए., एल.एल.बी. तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। वर्ष 1983 में जर्मनी के बर्लिन स्थित अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता संस्थान से पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल किया। विविध विषयों में अर्जित यह शिक्षा उनकी व्यापक दृष्टि और अध्ययनशील व्यक्तित्व की आधारभूमि बनी।
दैनिक विश्व परिवार के संपादक के रूप में उन्होंने पत्रकारिता को स्थानीय जनजीवन, सामाजिक सरोकारों और सकारात्मक संवाद से जोड़ा। आकाशवाणी के वार्ताकार के रूप में भी उन्होंने जनसामान्य से जुड़े विषयों को प्रभावी अभिव्यक्ति दी। साहित्य के क्षेत्र में उनकी सक्रियता उनके रचनात्मक व्यक्तित्व का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। ‘चेतन तीर्थ मुनिराज हमारे’, ‘उनके घर में आनंद ही आनंद है’, ‘विश्व परिवार बचालो’, ‘जय लॉकडाउन देव—आरती’, ‘सबसे नौने नौने बोलो’ और ‘मां की महिमा कैसे गाऊं’ जैसी काव्य रचनाएं उनकी साहित्यिक अभिरुचि को रेखांकित करती हैं।
सम्मान से राष्ट्रीय दायित्व तक
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को राजा श्रेयांस पत्रकारिता पुरस्कार, कोटा से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में 2018 से 2021 तक सदस्य के रूप में उन्होंने परिषद में पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव और सुझावों के माध्यम से सहभागिता निभाई।अब, दैनिक विश्व परिवार के स्वर्णिम वर्ष में, उन्हें प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में पुनः सदस्य मनोनीत किया जाना इस पूरी पत्रकारिता परंपरा के लिए विशेष गौरव का अवसर है। यह केवल व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस विचार और संस्कार का सम्मान भी है, जिसकी शुरुआत 1976 में झांसी से हुई थी और जो आज झांसी से रायपुर दो राज्यों तक अपनी पहचान बनाए हुए है।
वे जैन पत्रकार महासंघ के संरक्षक भी हैं। 30 सितंबर 2026 को रायपुर में उनके नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन उनकी संगठनात्मक और समन्वयकारी क्षमता का उदाहरण रहा। देशभर से आए पत्रकारों की सहभागिता वाले इस आयोजन ने पत्रकारिता के सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक सरोकारों पर सार्थक संवाद का अवसर दिया।
पद से बड़ी पहचान—सहजता
प्रदीप कुमार जैन की उपलब्धियों के बीच उनकी सबसे आत्मीय पहचान उनका सरल, सहज और समन्वयकारी व्यवहार है। लंबे सार्वजनिक जीवन और अनेक दायित्वों के बावजूद संवाद में उनकी आत्मीयता बनी रही है। यही गुण उन्हें पद से आगे एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है, जिसके साथ लोग सहजता से जुड़ते हैं।
उनकी यात्रा का सार यही है—पत्रकारिता विरासत में मिल सकती है, लेकिन विश्वसनीयता अर्जित करनी पड़ती है। स्वर्गीय कैलाशचंद जी द्वारा रोपे गए पत्रकारिता के बीज को परिवार की अगली पीढ़ियों ने अपने श्रम और संस्कारों से सींचा। स्वर्गीय प्रवीण कुमार जैन का योगदान हो या प्रदीप कुमार जैन का सतत नेतृत्व—विश्व परिवार की पांच दशक लंबी यात्रा इसी सामूहिक साधना का परिणाम है।
आज जब दैनिक विश्व परिवार अपने स्वर्णिम वर्ष का उत्सव मना रहा है, उसी समय प्रदीप कुमार जैन का राष्ट्रीय स्तर पर पुनः प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का सदस्य मनोनीत होना इस यात्रा में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है।
प्रदीप कुमार जैन को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। विश्वास है कि उनका अनुभव, संतुलित दृष्टिकोण और सहज नेतृत्व पत्रकारिता की मर्यादा, विश्वसनीयता और सामाजिक उत्तरदायित्व को नई मजबूती देगा। विश्व परिवार की तरह उनकी कलम भी सदैव समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच जगाने और प्राणीमात्र के कल्याण की भावना को स्वर देती रहे—यही मंगलकामना है।

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