भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी को मानवीय दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए;

प्रौद्योगिकी का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे: राज्यपाल 



मुंबई
 : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा साइंस जैसी भविष्यवेधी प्रौद्योगिकियों का विकास मानवीय दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए तथा इन प्रौद्योगिकियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री जिष्णु देव वर्मा ने आज यहाँ किया।

राज्यपाल  जिष्णु देव वर्मा की अध्यक्षता में लोक भवन, मुंबई में कुलपतियों के ‘भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी मंच’ (Futuristic Technology Forum) की बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों तक इस विषय को प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए विश्वविद्यालयों के बीच परस्पर सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर अधिक समावेशी बनाए जाने चाहिए।

बैठक में भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी समूह के प्रमुख एवं शिवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रजनीश कामत, सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुनील भिरूड, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रा. अरविंद किवळेकर तथा अन्य अध्यापक उपस्थित थे।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से शिक्षण अधिक संवादात्मक और प्रभावी हो सकता है, ऐसा राज्यपाल ने कहा। देश में जनसंख्या की तुलना में चिकित्सकों की उपलब्धता को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के माध्यम से अधिक सटीक रोग-निदान संभव हो सकता है तथा इसका लाभ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की जनता को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से विस्मृति जैसे रोगों के प्रारंभिक संकेतों की पहचान करने के साथ-साथ दवा अनुसंधान में भी सहायता मिल सकती है।

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी AI के व्यापक उपयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समुद्री मार्ग से होने वाले माल परिवहन की विभिन्न प्रक्रियाओं पर AI की सहायता से निगरानी रखी जा सकती है तथा माल के गंतव्य तक पहुँचने के समय का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी समूह के प्रमुख डॉ. रजनीश कामत ने कहा कि समूह की सिफारिशों के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों को वर्ष 2030 तक विकसित होने वाली नई प्रौद्योगिकियों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग के संबंध में भी विश्वविद्यालयों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुनील भिरूड ने ‘स्वास्थ्य क्षेत्र में AI’ विषय पर तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रा. अरविंद किवळेकर ने ‘लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में AI’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया।

राज्यपाल के हस्ते डेटा साइंस पर पुस्तक का विमोचन

इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के हस्ते जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के प्रा. जॉन रोज द्वारा टोक्यो स्थित सोफिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के सहयोग से लिखित 'जॉय ऑफ पायथॉन: फाउंडेशन्स ऑफ डेटा सायन्स' पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पुस्तक के सह-लेखक जॉन मुकुलु और टेड गोंसाल्विस भी उपस्थित थे।

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