राम के सद्गुणों को आत्म सात करें :- कमलमुनि
स्थानकवासी जैन संघ का कार्यक्रम
मैसूर :- स्थानकवासी जैन संघ हल्लद केरी के तत्वाधान में जैन स्थानक भवन पर विजयदशमी पर संबोधित करते हुए कमल मुनि कमलेश ने कहा अपनी आत्मा में राम के सद्गुणों को आत्म सात करने के बाद रावण के बारे में सोचें इससे बढ़कर दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। क्रोध अहंकार व्यसन भ्रष्टाचार आतंकवादी हिंसा अनीति जैसी बुरेकामों से स्वयं रावण बना हुआ रावण को मारने के लिए जा रहा है अच्छाई का प्रतीक राम है और बुराई का प्रतीक रावण है। पहले तो एक ही रावण था फिर भी उसने नीति का पालन किया और सीता को बिना पूछे उसको हाथ नहीं लगाया।
उन्होंने कहा कि आज तो गली गली और घर-घर में रावण ही रावण नजर आ रहे हैं। राम के दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं सात्विक नम्र सरल और विनय मर्यादा सादगी और सहनशीलता आदि अच्छाइयों का आदर्श प्रस्तुत करते हुए पिता की आज्ञा का पालन कर 14 साल वनवास के लिए सहर्ष प्रस्थान किया। उनको किसी धर्म और जाति के संकीर्ण नजरिया नजरे से देखना सभी महापुरुषों का अपमान करने के समान है वह संपूर्ण मानवता की अनमोल धरोहर है। प्राणी मात्र के कल्याण की मंगल कामना करने वाला ही सच्चा राम का उपासक बन सकता है जो गाली देने वाले को भी आशीर्वाद प्रदान करता है ।
अंतर्राष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच शाखा नई दिल्ली राष्ट्रीय मंत्री निर्मल कुमार जैन सविता जैन सारिका जैन नाम मुनि कमलेश को दिल्ली चातुर्मास करने की विनंती की संघ की ओर से उनका अभिनंदन किया गया। 21 अक्टूबर को मैसूर के प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव के अंदर आयोजन समिति की ओर से राष्ट्रसंत कमल मुनि जी कमलेश को विशेष अतिथि रूप से आमंत्रित किया गया था।कार्यक्रम का संचालन सचिव बुद्धमल बागमार ने किया।

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