AI फिल्म ‘सातगौड़ा से चारित्र चक्रवर्ती तक’ को मिले दो और विश्व रिकॉर्ड, ललित सरावगी जैन और चांदनी सरावगी हुए सम्मानित
प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के जीवन पर आधारित AI फिल्म ने रचा नया इतिहास, वाह ज़िंदगी के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि
इंदौर :- प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के संपूर्ण जीवन पर AI तकनीक से निर्मित फिल्म ‘सातगौड़ा से चारित्र चक्रवर्ती तक’ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। फिल्म को ट्रांसओशिएना वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (TRANSOCEANA WORLD RECORDS) की ओर से दो नए विश्व रिकॉर्ड प्रदान किए गए हैं। इस उपलब्धि के साथ फिल्म और इसके निर्माण से जुड़े लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
इनमें एक विश्व रिकॉर्ड फिल्म के निर्माता एवं वाह ज़िंदगी के संस्थापक ललित सरावगी जैन को AI तकनीकी के सर्वश्रेष्ठ प्रयोग कर हूबहू साक्षात जीवंत और उनकी आवाज में प्रथमाचार्य आचार्यश्री शांतिसागरजी को दिखाने पर दिया गया है। वहीं, दूसरा विश्व रिकॉर्ड उनकी पुत्री चांदनी सरावगी, को वाह ज़िंदगी की सह-संस्थापक (Co-Founder) के रूप में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला है।
ट्रांसओशिएना वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रमाण-पत्र में इस फिल्म को “ऐतिहासिक AI-जनरेटेड सिनेमैटिक बायोपिक : आचार्य श्री शांतिसागर महाराज का परम त्याग” (Historic AI-Generated Cinematic Biopic: Supreme Renunciation of Acharya Shri Shantisagar Maharaj) के रूप में मान्यता दी गई है। प्रमाण-पत्र में फिल्म के माध्यम से आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज से प्रेरित दिगंबर जैन तपश्चर्या की 150 वर्षों की स्मृति को संजोने तथा अपरिग्रह, त्याग और आध्यात्मिक उत्कृष्टता के शाश्वत आदर्शों को जीवंत बनाए रखने में दिए गए योगदान का उल्लेख है। यह प्रमाण-पत्र 25 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड निर्णायक जयेश कोठारी द्वारा इंदौर में विशाल जन समूह के समक्ष प्रदान किया गया है।
इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए ललित सरावगी जैन ने कहा, “एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है कि जो उपलब्धियाँ उसने 60 वर्ष की उम्र के बाद प्राप्त कीं, वही बेटी 35 वर्ष की उम्र में हासिल कर रही है। यह सब गुरुदेव का आशीर्वाद है।”
AI तकनीक के माध्यम से आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के जीवन, त्याग और तपस्या को सिनेमाई स्वरूप में प्रस्तुत करने वाली यह फिल्म जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखती है। फिल्म को विभिन्न शहरों में प्रदर्शित किया जा चुका है और इसे लेकर समाज में उत्साह देखा जा रहा है।
दो नए विश्व रिकॉर्ड मिलने से वाह ज़िंदगी की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह सफलता न केवल फिल्म निर्माण के क्षेत्र में AI तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित करती है, बल्कि जैन धर्म की आध्यात्मिक विरासत और त्याग की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के प्रयास को भी नई पहचान देती है। नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।

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