जापानियों के जीवन मे नवकार मंत्र जाप ने लाया परिवर्तन
पिछले 25 वर्षों से जापान में होती है नवकार आराधना मुंबई :- धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाली जापान की मनोचिकित्सक चूरूसी मियाजावा बताती है कि 2004 में सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में भारत यात्रा के दौरान जैसलमेर के जैन मंदिरों और जैन धर्म की शिक्षाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। जन्म से बौद्ध मियाजावा का कहना है कि जैन धर्म और त्रिस्तुतिक संघ नायक, गच्छाधिपति आचार्य जयंतसेन सूरीश्वरजी से उनका संबंध उन्हें किसी पुराने आध्यात्मिक रिश्ते जैसा महसूस होता है। उनका दावा है कि आचार्य के प्रत्यक्ष दर्शन से पहले ही वे उन्हें स्वप्न में देख चुकी थीं। जब पहली बार आचार्य के साक्षात दर्शन हुए,तो वे स्वयं भी इस संयोग से आश्चर्यचकित रह गई। इसके बाद शुरू हुई उनकी आध्यात्मिक यात्रा जो आज तक जारी है। गुरुदेव से नवकार महामंत्र का अर्थ समझने के बाद उसका जापान में प्रचार प्रसार शुरू किया। श्री त्रिस्तितिक संघ में चातुर्मास हेतु बिराजमान पुण्य सम्राट के शिष्य,प्रखर प्रवचनकार मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा.के सानिध्य में 34 जापानी नागरिक जैन धर्म के पर्यूषण पर्व की आराधना में लीन है। इनमें 9 पुरुष और 25 मह...