विद्या दान से बड़ा कोई दान नहीं — अपनी मातृभूमि और विद्यालय का ऋण चुकाने की प्रेरक मिसाल
पूरे समाज के लिए प्रेरणा है चौधरी परिवार का काम सिन्दरली (पाली) :- अक्सर कहा जाता है कि “धन का दान व्यक्ति की सहायता करता है, लेकिन विद्या का दान पीढ़ियों का भविष्य बदल देता है।” पाली जिले के सिन्दरली गांव के पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी गुलाब चौधरी और गणपत चौधरी ने इस विचार को साकार करते हुए अपनी मातृभूमि और शिक्षा के प्रति ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। जिस राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बैठकर उन्होंने जीवन की पहली पाठशाला में शिक्षा ग्रहण की, उसी विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करोड़ों रुपये की लागत का भव्य दो मंजिला भवन भेंट कर उन्होंने यह संदेश दिया कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं, बल्कि उस संस्थान को भी आगे बढ़ाना है जिसने हमें आगे बढ़ने की राह दिखाई। आज जब समाज में शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, ऐसे समय में यह योगदान केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि आने वाली हजारों छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। यह भवन वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण व...