साहित्य मानव जीवन की शुद्ध प्राणवायु है।
अतुकांत काव्य विधा के लिए राष्ट्रीय काव्य अकादमी पुरस्कार के लिए चयन होना जीवन की श्रेष्ठ उपलब्धि डॉ सुरेन्द्र मीणा व्यक्ति अपने जीवन की शुरुआत पगडंडी से लेकर मुख्य मार्ग तक आने के लिए अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ता। धीरे धीरे यही प्रयास व्यक्ति को मनवांछित मुकाम तक पहुंचा ही देते हैं।आज हम आपको ऐसी ही शख्सियत से रुबरु करवा रहे है जिन्होंने बचपन की स्कूली शिक्षा में महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए अपनी शैक्षणिक यात्रा के साथ साहित्य यात्रा का भी आगाज किया। मूल रूप से जसरापुर (खेतड़ी) झुंझुनू राजस्थान के निवासी तथा 17 अप्रैल 1977 को नागदा (मध्यप्रदेश) में जन्में डॉ सुरेंद्र मीणा को हाल ही में काव्य की अतुकांत विधा के लिए काव्य साहित्य अकादमी पुरस्कर से 30 जून को राजधानी नई दिल्ली में सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई है। इसी संदर्भ में हमने डॉ मीणा से विस्तार से बात की। प्रश्न - आपका नाम इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयनित होने पर आप कैसा महसूस कर रहे है ? डॉ मीणा - आपका धन्यवाद, पुरस्कार कोई भी हो। उसका आभास ही मन को पुलकित और पल्लवित करता है। राजधानी...