जापानियों ने श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ मन्दिर के दर्शन किये
गुरु बिना जीवन अंधकारमय हैं भायंदर : - गुरु बिना जीवन अंधकारमय है। गुरु ही हमें अज्ञान के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। वह केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीने की कला, संस्कार और सही-गलत की पहचान सिखाता है। उपरोक्त विचार जापान की मनोचिकित्सक तुलसी जैन (चूरूसी मियाजावा) ने भायंदर के 88 साल पुराने श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर व साध्वी सोम्यकला श्रीजी आदि ठाणा के दर्शन करने के बाद विशाल धर्मसभा में व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि माता-पिता जन्म देते हैं, पर गुरु जीवन को दिशा देता है। वह हमारी कमियों को दूर कर हमारे अंदर छिपी प्रतिभा को निखारता है। गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन ही शिष्य को सफलता के शिखर तक पहुँचाता है। इसलिए कहा गया है - गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु ही साक्षात परब्रह्म है।साध्वी सोम्यकला जी ने कहा कि अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जापान में रहने के बाद भी वे संस्कारों और गुरु के बताए मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं। ज्ञात हो 34 जापानी श्री त्रिस्तुतिक जैन संघ,भायंदर (वेस्ट) में चातुर्मास हेतु बिराजमान मुनिराज निपुणरत्न विजयजी म.सा. की निश्रा में पर्व पर्युषण की ...