सांसारिक वैभव क्षणिक, आत्मकल्याण ही जीवन की वास्तविक उपलब्धि : गणधर मुनि विवर्धनसागर
कोटा में मुनिसंघ द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना अनुपमा राजेन्द्र जैन महावीर कोटा | रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में रक्षाबंधन वात्सल्य पर्व एवं भगवान श्रेयांशनाथ निर्वाण महोत्सव श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महामुनिराज के सुशिष्य गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज एवं प्रवर्तक मुनि श्री 108 विश्वनायक सागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री विवर्धनसागर जी महाराज ने जीवन की वास्तविक उपलब्धि, आत्मकल्याण और रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य संसार में सुख और वैभव प्राप्त करने के लिए निरंतर दौड़ता रहता है। धन, संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा को जीवन की सफलता मान लिया जाता है, लेकिन यह सब क्षणिक है। जीवन की वास्तविक उपलब्धि सांसारिक वैभव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण है। मनुष्य को यह विचार करना चाहिए कि जीवन की इस यात्रा में उसने अपने लिए क्या संचित किया और अपनी आत्मा को कितना निर्मल बनाया। उन्होंने कहा कि संसार की प्रत्येक वस्तु परिवर्तनशील है। आज जो...