जिसने भक्तामर को समझ लिया वह हर समस्या का हल पा जाएगा

विज्ञान और अध्यात्म की सेतु रचना है भक्तामर स्तोत्र

आत्म-निर्जरा" और मानसिक डिटॉक्स का अचूक उपाय है भक्तामर।

दीपक जैन / भायंदर


भक्तामर स्तोत्र विज्ञान और अध्यात्म की सेतु रचना है,जिसने इसे समझ लिया वो समस्या का समाधान ढूंढ सकता है।आइए हम बात करते है डॉ. अनीश जैन से, जो एक प्राकृतिक चिकित्सक और इंटरनेशनल ख्याति प्राप्त स्पिरिचुअल हीलर हैं। वह इंटरनेशनल भक्तामर हीलिंग एंड रिसर्च फाउंडेशन, नागपुर के संस्थापक भी हैं।हम समय समय पर आपको भक्तामर स्तोत्र के महत्व और इसके प्रभावों के बारे में और अधिक जानकारी प्रदान करते रहेंगे।

प्रश्न 1: भक्तामर स्तोत्र क्या है और इसका महत्व क्या है?

उत्तर :- भक्तामर स्तोत्र आचार्य मानतुंग कृत एक अद्भुत स्तोत्र है, जो जैन परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण है। यह न केवल आध्यात्मिक उत्थान करता है, बल्कि न्यूरोसाइंस और मेडिकल साइंस को भी अपने प्रभाव से चकित करता है।अध्यात्म के मंत्रों के आगे विज्ञान भी झुकता हैं।एक साधारण पाठक भी जब इसका श्रवण करता है, तो 15 मिनट में मानसिक स्थिरता और आंतरिक प्रसन्नता अनुभव करता है यह अनुभव नहीं, प्रयोग से सिद्ध है।

प्रश्न 2:- भक्तामर स्तोत्र के उच्चारण से मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर :- भक्तामर स्तोत्र के उच्चारण से मस्तिष्क की अल्फा और थीटा वेव्स सक्रिय होती हैं, जिससे तनाव कम होता है, हृदय गति और रक्तचाप नियंत्रित होता है, और मन नकारात्मकता से मुक्त होता है।

प्रश्न 3 :- भक्तामर स्तोत्र के ध्वनि कंपन चिकित्सा (Sound Vibration Therapy) के सिद्धांत पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर :- भक्तामर स्तोत्र ध्वनि कंपन चिकित्सा के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिससे रक्त संचार और ऑक्सीजन आपूर्ति बेहतर होती है, और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। यह तनावजनित रोगों में भी राहत देता है।45वां श्लोक गंभीर असाध्य रोगों में आश्चर्यजनक राहत देता है।

प्रश्न 4 :- गर्भ संस्कार में भक्तामर स्तोत्र का क्या महत्व है?

उत्तर :- गर्भ संस्कार में भक्तामर स्तोत्र का नियमित पाठ भ्रूण के मस्तिष्क में न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ाता है, जिससे बच्चे को श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण की ओर ले जाता है। हमने 15 वर्षों में लगभग 15,000 गर्भ संस्कारी बच्चों को जन्म लेते देखा है, जिनमें अनुशासन, नैतिकता, तेज स्मरण शक्ति, और सकारात्मक सोच प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं।

प्रश्न 5: निष्काम भक्ति और भक्तामर स्तोत्र का क्या संबंध है?

उत्तर :-  निष्काम भक्ति से उच्चारित भक्तामर स्तोत्र आत्म-निर्जरा और मानसिक डिटॉक्स का अचूक उपाय है। यह भक्ति की शक्ति का प्रमाण है, जब मन पूर्ण समर्पण में होता है, तो शरीर के सारे रोग, तनाव और ग्रंथियाँ ढीली पड़ने लगती हैं।

प्रश्न 6 :- भक्तामर स्तोत्र के और क्या लाभ है ?

उत्तर :- भक्तामर स्तोत्र के लाभों को और अधिक विस्तार से जानने के लिए, आप निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं,इस स्तोत्र का उच्चारण करने से ध्यान और मानसिक शांति में वृद्धि होती है,यह स्तोत्र तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। भक्तामर स्तोत्र का नियमित पाठ करने से आध्यात्मिक विकास होता है और आत्म-ज्ञान में वृद्धि होती है।यह स्तोत्र शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाने में मदद करता है, विशेष रूप से तनावजनित रोगों में।भक्तामर स्तोत्र केवल पूजा का साधन नहीं, यह एक जैव-ध्वनि विज्ञान है जो मस्तिष्क को स्थिर करता है।निष्काम भाव से उच्चारित यह स्तोत्र "आत्म-निर्जरा" और मानसिक डिटॉक्स का अचूक उपाय है।

प्रश्न 7 :- भक्तामर स्तोत्र के बारे में और अधिक जानने के लिए कहाँ से संपर्क करें?

उत्तर :- अधिक जानकारी व शोध हेतु आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।इन लाभों को प्राप्त करने के लिए, आप नियमित रूप से भक्तामर स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं और इसके अर्थ और महत्व को समझने का प्रयास कर सकते हैं।


























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