श्री मणिलक्ष्मी तीर्थ में सम्पन्न हुआ गुरुकुलवास
निपुणरत्न विजय ने किया युवा युवतियों का मार्गदर्शन
मणिलक्ष्मी (गुजरात):- गुजरात के श्री मणिलक्ष्मी तीर्थ में तीन दिवसीय गुरुकुलवास संपन्न हुआ।देशभर से इसमें युवा युवती शामिल हुए।दिन में तीन बार वाचना श्रेणी में विविध विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
तीर्थ प्रांगण में हुई वाचना श्रेणी के वाचनादाता पुण्य सम्राट,गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा.के शिष्य समता गुणरसिक मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा.थे।प्रतिदिन 2 घंटे की 3 वाचना हुई, 3 दिन में 20 घंटे की वाचना हुई।प्रथम वाचना प्रातः 5:30 से 7:30 तक वर्धमान शक्रस्तव आधारित परमात्मा के विशेषणों में से नमो मानज्जराय पद पर हुई, जिसमें अभिमान की भयंकरता एवं बचने के उपाय बताये गये, जहां मान है, वहां विनय नही, जहां विनय नहीं,वहाँ धर्म नहीं, बिना धर्म मोक्ष नहीं है।उसके बाद विशाल जिनालय में सामूहिक चैत्यवंदनहोता था ।
दूसरी वाचना प्रातः 9:30 से 12:00 बजे तक में जिसमें पूज्य देवचंद्रजी रचित चोवीसी में से श्री महावीर परमात्मा के स्तवन आधारित वाचना हुई, जिसमें परमात्मा की भक्ति का स्वरुप बताया गया, मुक्ति के लिए भक्ति, भक्ति के लिये प्रार्थना एवं प्रार्थना के लिए स्वामी - सेवक का संबंध जरुरी है।मुनिराज ने कहा कि परमात्मा के सन्मुख सेवक बनकर हमारे भीतर रहे दोषों का स्वीकार करना चाहिये।तृतीय वाचना दोपहर 2:30 से 4:00 बजे तक हुई, जिसमें श्री स्थुलिभद्र चरित्र का वांचन हुआ। इसमें मुनिराज ने बताया कि इसके आधार से हमारा जीवन विकारों से मुक्त कैसे हो सकता है,का सुंदर वर्णन हुआ।उन्होंने अनुचित वेश का त्याग, पिकनिक स्थान का त्याग, अभक्ष्य भोजन त्याग आदि को मुनिराज ने विशेष प्रेरणा दी।
निपुणरत्नजी ने तृतीय वाचना में सामूहिक भक्ति,संवेदना एवं आरती के बाद सामूहिक प्रतिक्रमण होता था।तीनों दिन आराधकोने मौन, उचित वेश, Mobile त्याग,
समय का पूर्ण पालन आदि नियमों का सुंदर पालन कर इसे यादगार बनाया।आगामी गुरुकुलवास के लिए मणिलक्ष्मी परिवार एवं रमेश कुमारजी मिश्रिमलजी बालगोता परिवार ने विनंति की ।इस अवसर पर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाघजीभाई वोरा, पंडीतवर्य बाबुभाई शेठ ( भगत ) सहित अनेक महानुभाव उपस्थित थे।संपूर्ण गुरुकुलवास की व्यवस्था के लिए बिना कोई नाम की अपेक्षा युवा श्रावको ने सुंदर अनुमोदनीय सहयोग दिया।
अनेक आराधको ने तीनो दिन आयंबिल एकासणा, बियासणा किया। इसमें वर्षीतप के भी आराधक थे।जाते समय आराधको ने उद्भट वेश त्याग, सामायिक, पूजा, वांचन, वेयावच्च आदि के नियम लिये।तीनो दिन संगीत की प्रस्तुति श्री संघ के युवा श्रावक चारित्रभाई, दर्शन दोशी, कुशल शेठ, साहील धरु, हेत शेठ व आर्यभाई ने बिना साउंड के प्रदान की
गुरुकुलवास को मणिलक्ष्मी तीर्थ पेढी का संपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।सभी आराधकों ने विनंती की कि गुरुकुलवास वर्ष में तीन दिन की जगह पांच दिन करने की भावना प्रगट की।


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