भाष्य जाप अनुष्ठान एवं श्री ऋषभ सूरिजी इक्कीसा मंगल पाठ का आयोजन

  ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. की तीसरी मासिक पुण्यतिथि 

झाबुआ :- परम पूज्य गच्छाधिपति,परोपकार सम्राट आचार्य देव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. की तीसरी मासिक पुण्यतिथि पर सामुहिक भाष्य जाप अनुष्ठान एवं श्री ऋषभ सूरिजी इक्कीसा मंगल पाठ का आयोजन गुरु समर्पण चातुर्मास समिति के अंतर्गत मनाया गया। 

इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा ने कहा कि चार गति में सबसे कम दुख मानव योनि में है यहीं से मोक्ष में जाकर शाश्वत सुख के स्वामी बन सकते हैं। अनेकों भव के बाद मानव अवतार मिला है। एक एक समय धर्म आराधना करते हुए बिताना चाहिए। दस दुष्टांत से दुर्लभ मानव जीवन की प्रवचन कड़ी में मुनिश्री ने पांच वे रत्न एवं छट्टे स्वप्न से जुड़े रोचक प्रसंग का वर्णन सुनाया।एक बार रत्न हाथ से निकला उसे फिर से  प्राप्त करना दुर्लभ है। एक बार श्रेष्ठ स्वप्न आकर गया वह दोबारा आना मुश्किल है। ठीक वैसे ही मानव जीवन के प्राप्ति पुनः दुर्लभ है ।

मुनिश्री ने कहा पर्युषण महापर्व में एक दिन शेष है अच्छे से तैयारी करके आराधना में सभी को जुड  जाना है । सुबह से शाम तक धर्ममय बने। जहां तक हो मौन करें। जयणा पालन करें ।आरंभ समारंभ से दूर रहे। सभी से प्रेम पूर्ण व्यवहार करें । सभी को अपना माने मौत्री के भाव से क्षमापना कर जीवन सफल बनावे। पूज्य आचार्य श्री ऋषभचंद्र सुरीश्वरजी म.सा. के चित्रपर मुकेश रुनवाल,अभय धारीवाल, मनोज जैन, सुभाष कोठारी आदि ने माल्यार्पण किया। नवकार मंत्र आदिनाथ प्रभु के मंत्र गौतम स्वामी सुरी राजेंद्र व सूरी ऋषभ सूरिजी के मंत्र जाप किये गये। इस मौके पर स्यामुबाई रुनवाल,मुकेश रुनवाल की ओर से प्रभावना की गई । सामूहिक अट्ठाई का  विराट आयोजन पर्युषण पर्व के तहत होने वाला है। सभी जुड़े तपाराधना करे।

शासन प्रभावक चातुर्मास में महाराष्ट्र, साउथ गुजरात, राजस्थान सहित अनेक राज्यों के संघों एवं गुरु भक्तों का आवागमन निरंतर जारी है।

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