पर्युषण समस्त संसार की कामनाओं का महापर्व :- आचार्य चंद्रानन सागर
चंद्रानन सागर ने कहा कि जीवन की सरलता, सबलता व सफलता इसी में नीहित
मुंबई। राष्ट्रसंत आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वर महाराज ने कहा है कि पर्युषण मनुष्य के लिए अपने जीवन के ईमानदार विश्लेषण का अवसर है, जो हमारी आत्मा को परमात्मा से जोड़कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। शुक्रवार से शुरू हो रहे 8 दिवसीय पर्युषण महापर्व की मनुष्य के जीवन में महत्ता को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने कहा कि जैन धर्म की परंपरा का यह पर्व समस्त मानव जाति का महापर्व है। क्योंकि इसमें मनुष्य जीवन की सरलता, सबलता व सफलता के सभी अवसर नीहित हैं।
पर्युषण महापर्व के शुभारंभ पूर्व एक विशेष बातचीत में जैन धर्म के विख्यात संत आचार्य चंद्रानन सागर ने कहा कि पर्युषण महापर्व आत्म विवेचना का पर्व है, जिसके दौरान जप, तप ध्यान, भक्ति, पूजा, व आत्मशुद्धि की विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ साथ साधु संतों से सान्निध्य में रहकर मनुष्य अपने जीवन की अशुद्धियों को दूर करने के प्रत्यन करता है। युवा समाजसेवी प्रवीण शाह से हुई इस विशेष बातचीत में आचार्य चंद्रानन सागर ने कहा कि यह आत्मशोधन व आत्मोत्थान का अवसर है। क्योंकि पर्युषण ही उन सभी आयोजनों का समय है, जब मनुष्य अपने आत्मविवेक को जागृत करते हुए वर्तमान नजरिये से अतीत में झांकने और भविष्य को देखते हुए विवेकी निर्णय से एक नये सफर की शुरुआत कर सकता है। पर्युषण महापर्व को हमारे जीवन में हर साल आनेवाले जीवन के कल्याण का अवसर बताते हुए आचार्य चंद्रानन सागर ने पर्युषण की व्याख्या में कहा कि वर्तमान समय की चकाचौंध में जब हर व्यक्ति स्वयं के विकास के लिए भाग रहा है, तो इस अंधी दौड़ में पर्युषण पर्व का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। क्योंकि यही एकमात्र ऐसा अवसर है, जब प्रत्येक मनुष्य क्षमा, शील, दया, करुणा, संयम, स्वाध्याय, आहार, इन्द्रिय निग्रह आदि के अपने भीतरी तत्वों को जागृत करके समस्त संसार के कल्याण की कामना कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि आचार्य चंद्रानन सागर देश भर में युवा पीढ़ी के गुरू के रूप में विख्यात हैं। युवा समाजसेवी मोती सेमलानी के मुताबिक जैन समाज सहित हर वर्ग की युवा पीढ़ी में आचार्य चंद्रानन के प्रति दीवानगी का अपना अलग अंदाज है, क्योंकि वे हर धर्म के महापुरुषों के उद्धरण अपने व्याख्यानों में प्रस्तुत करते हैं। उदाहरण के तौर पर आचार्य चंद्रानन सागर कहते हैं कि स्वामी विवेकानन्द ने भी धर्म के महत्व को बताते हुए कहा था कि धर्म वह धारा है, जिसके द्वारा पशु मानव तक और मानव परमात्मा जैसा स्वयं को बना सकता है। दर्शन भक्त प्रवीण शाह के अनुसार आचार्य चंद्रानन सागर की धर्म व समाज को देखने की एक विशिष्ट दृष्टि है। आचार्य चंद्रानन सागर ने युवा वर्ग की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सराहनीय है कि युवा पीढ़ी पर्युषण पर्व की मूल्यवत्ता से परिचित है। साथ ही जप, तप, पूजा, भक्ति, ध्यान, सामायिक, मौन, जीवदया व मानवसेवा आदि के माध्यम से जीवन के महत्व को जागृत करने की दिशा में प्रवृत्त है। इस बातचीत में आचार्य चंद्रानन ने कहा कि पर्युषण के इन दुर्लभ 8 दिनों में व्यक्ति हर क्षण स्वयं को लाभान्वित करते हुए समस्त संसार के सुख की कामना करता है। इसीलिए, पर्युषण महापर्व को मात्र जैन धर्म का ही नहीं, बल्कि एक सार्वभौम पर्व माना जाने लगा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के लिए यह आवश्यक है कि वह वही करे, जो धर्म के अनुकूल हो, किंतु अपने किए हुए का अहंकार कभी न करे, तो भी पर्युषण पर्व की तरह ही हर मनुष्य के लिये हर दिन मोक्ष एवं परमगति की प्राप्ति का मार्ग बन जाता है।मुंबई में विरार के पास अहमदाबाद हाईवे पर विशाल नाकोड़ा दर्शन धाम के संस्थापक आचार्य चंद्रानन सागर जैन धर्म के दिग्गज संत माने जाते हैं। गच्छाधिपति आचार्य दर्शन सागर सूरीश्वर महाराज की परंपरा को आगे बढ़ानेवाले चंद्रानन सागर महाराज वर्तमान में मुंबई के ठाकुरद्वार में चातुर्मास पर बिराजमान हैं। उनके दर्शनार्थ देश भर से रौजाना सैकड़ों लोग मुंबई आते हैं। इस बार के पर्युषण महापर्व में आचार्य चंद्रानन जीवन की सफलता व समग्र संसार के सामूहिक विकास के लिए विशिष्ट व्य़ाख्यान व ध्यान क्रियाएं आयोजित करनेवाले हैं, जिनमें रोजाना बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेंगे।


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