सात माह में व्याकरण का अभ्यास पूर्ण किया राजयोग विजयजी ने
वैभवरत्नजी के हैं शिष्य
सूरत :- त्रिस्तुतिक संघ नायक,राष्ट्र संत परम पुजाय आचार्य श्री जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा. समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा.,आचार्य श्री जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती प्रखर प्रवचनकार मुनिराज श्री वैभवरत्नजी म.सा. क शिष्य श्री राजयोग विजयजी म.सा. ने सात माह की अवधि में जैन व्याकरण का अभ्यास पूर्ण किया हैं। ज्ञात हो यह बहुत ही कठिन विषय हैं।त्रिस्तुतिक जैन संघ में यह प्रथम घटना हैं।
दीक्षा के बाद से ही राजयोग विजयजी धार्मिक अभ्यास में रम गए हैं। 10 माह में उन्होंने आचार्य श्री हेमचंद्राचार्यजी रचित एक हजार श्लोकों का भी वंचन किया हैं। नित गुरु सेवा में रहते राजयोग विजयजी समय समय पर तपस्या करते रहते हैं।गुरु के प्रति उनका उत्कृष्ट समर्पण हैं। वे वैभवरत्नजी के सांसारिक भतीजे हैं।अपने गुरु की तरह ही वे ज्ञान मार्ग में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।इसी के साथचरित्र पालक गुरुभाई मुनिराज श्री शंखेशरत्न विजयजी व मुनिराज श्री गोयामरत्न विजयजी म.सा.का सहयोग व मार्गदर्शन निरंतर मिल रहा हैं। आप भगवान महावीर के शासन में स्वर्णिम इतिहास लिखे यही मंगल कामना व जन्मदिन पर वंदन।
श्री वैभवरत्नजी के मेरे पर अनंत उपकार हैं। गुरुदेव का सूरत में चातुर्मास हर्षोल्लास के साथ चल रहा हैं।

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