आशापुरी में संरक्षण की पहल जमीन पर दिखाई देने लगी
धरोहर बचेगी, इतिहास बचेगा।
आशापुरी की प्राचीन जैन धरोहरों के संरक्षण को लेकर जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC) द्वारा लगातार उठाई जा रही मांगों और प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।पुरातत्व विभाग की टीम ने आशापुरी स्थित सतमासिया जैन मंदिर समूह एवं संबंधित पुरातात्विक क्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया।
इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मदन कुमार (IAS), संचालक, पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग, मध्यप्रदेश का जैन धरोहर संरक्षण परिषद की ओर से हार्दिक आभार। उनके नेतृत्व में विभाग द्वारा आशापुरी की इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल किया जाना स्वागत योग्य है।इसमें डॉ. मनीषा शर्मा की सक्रियता और तत्परता विशेष रूप से प्रशंसनीय हैं।
इस पूरे विषय में डॉ. शर्मा , संयुक्त निदेशक, पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग, मध्यप्रदेश का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है।
जैन धरोहर संरक्षण परिषद द्वारा आशापुरी की प्राचीन जैन तीर्थंकर प्रतिमा एवं सतमासिया जैन मंदिर समूह के संरक्षण का विषय उनके संज्ञान में लाए जाने के बाद उन्होंने जिस गंभीरता, संवेदनशीलता और तत्परता के साथ विषय को आगे बढ़ाया, वह सराहनीय है।
बजट संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से लेकर संरक्षण कार्य की दिशा में विभागीय स्तर पर पहल और अब पुरातत्व विभाग की टीम को स्थल निरीक्षण के लिए आशापुरी तक पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका निश्चित रूप से प्रशंसा की पात्र है।
विशेष बात यह है कि डॉ. शर्मा ने इस विषय को केवल एक प्रतिमा के संरक्षण तक सीमित न मानकर एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के रूप में गंभीरता से लिया। उनके सकारात्मक दृष्टिकोण से जैन समाज में भी विश्वास और उत्साह बढ़ा है कि आशापुरी की इस प्राचीन धरोहर को अब वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से उचित संरक्षण मिल सकेगा।
यह पहल केवल एक प्रतिमा के संरक्षण की शुरुआत नहीं, बल्कि आशापुरी की प्राचीन जैन विरासत को उसका गौरव लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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