भीख मांगनेवाले बच्चों का जीवन बदलती शिक्षिका बीना केदावत
ज्ञानवर्धक शैक्षणिक वीडियो का लेती है सहारा
स्वाती जैन
कोटा : ये खुद सरकारी विद्यालय की शिक्षिका हैं लेकिन संवेदनशील इतनी कि अपने आसपास के भीख मांगने और कचरा बीनने वाले बच्चों को छुट्टी वाले दिन समय मिलते ही पढ़ाना नहीं भूलती। वहीं वह रचनात्मक इतनी ज्यादा हैं कि बच्चों को पढ़ाने के लिए बना बनाया ढर्रा प्रयोग में नहीं लेती बल्कि खुद ज्ञानवर्धक शैक्षणिक वीडियो बनाती हैं और खेल खेल में बच्चों को सिखाती हैं।ये हैं बीना केदावत जो राजस्थान के कोटा के
अरंडखेडा पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका होने के बावजूद भी अपने एक एक पल का सदुपयोग कर इन होनहार वंचित बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और संवारने में लगी हैं।तंबोला से संख्या और शब्दों को पढ़ाना कि कोई बच्चा कभी स्कूल आने में आनाकानी ही ना करे और लौकी, आलू जैसी सब्जियों पर फनी रील और शॉर्ट्स बनाकर बच्चों को दिखलाना कि हर बच्चा शौक से सब्जी खाने लगे। यही कारण है कि इनके बनाये इनोवेटिव आइडियाज़ तो आज राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग को भी प्रेरित कर रहे हैं और अब तक ये शिक्षा, जल संरक्षण , बाल अधिकार , चाइल्ड सेफ्टी , प्लास्टिक मुक्त समाज, बेटी बचाओ जैसे हर जरूरी विषय पर 400 से अधिक शैक्षणिक वीडियो बना चुकी हैं।
पिछले 12 वर्ष से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी बीना अपने वंचित बच्चों के स्कूल में भी इन्हीं सब आइडियाज को लेकर पढ़ाती हैं और विभिन्न बस्तियों के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए कोटा के सरकारी स्कूल में एडमिशन करा देती हैं।बीना बताती हैं कि अपने इन दो स्कूलों की जिम्मेदारी के अलावा इन्होंने अंत्योदय फाउंडेशन के सहयोग से अब तक कोटा जिले के 92 सरकारी स्कूलों में खिलौना बैंक स्थापित करवाये हैं और ग्रीन सोल फाउंडेशन के सहयोग से सरकारी विद्यालयों के लगभग 14 हजार बच्चों के बीच 29 हजार 222 रिसाइकिल, स्कूल बैग , मैट व स्लीपर वितरित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं बीना बाल संरक्षण कार्यकर्ता के रूप में बच्चों को गुड टच और बैड टच का भी प्रशिक्षण देती हैं।
शिक्षा के प्रति इन सब जिम्मेदारियों को निभाने के साथ ही बीना समाज की विधवा और बेसहारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीनें उपलब्ध कराती हैं।इनके प्रयासों और अलग अलग फाउंडेशन के सहयोग से अब तक 80 लाख रुपए से अधिक का सामाजिक सहयोग बच्चों व जरुरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। हालांकि इन सब कार्यों के लिए इन्हें बहुत से राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिले हैं जिनमें मुख्य हैं राजस्थान सरकार द्वारा शिक्षक सितारे सम्मान, प्रधानमंत्री संग्रहालय का कमला पावर वूमन अवॉर्ड, नारी शक्ति सम्मान, अहिल्याबाई होलकर सम्मान, लेकिन असली सम्मान वह होता है जब इनकी वजह से किसी के जीवन में परिवर्तन आता है।

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