जापानी भक्तों ने जीता चातुर्मास प्रवेश में भायंदर वासियों का दिल
निपुणरत्न विजययजी का भव्य प्रवेश संपन्न
दीपक जैन
भायंदर :- पुण्यसम्राट गुरुदेव श्री विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य व गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा व आचार्य श्री जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती समता गुणरसिक,प्रखर प्रवचनकार मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास प्रवेश भव्य तरीके से हुआ।यह पहला चातुर्मास होने से संघ में जबरदस्त उत्साह है।
श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ-मुंबई द्वारा आयोजित मग्गदयाणं चातुर्मास मंगल प्रवेश में शामिल हुए हजारों भक्तों के साथ जापान से आएं 81 जापानियों ने भायंदर वासियों के दिल जीत लिया।महिलाओं ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप पोशाक पहनी थी व अपने सिर को पूरी तरह ढका हुआ था।पुरुषों ने कुर्ता पायजामा पहना था व सभी जिनशासन का ध्वज लहरा रहे थे,और पूरी चातुर्मास प्रवेश यात्रा में चप्पल नही पहने थे।यह लोग पिछले कई सालों से प्रवेश और नवकार मंत्र की आराधना करने गच्छाधिपति जयंतसेन सूरीश्वरजी की निश्रा में आते हैं।
प्रवेश शोभायात्रा 52 जिनालय से प्रारंभ हुइ जंहा मुनि भगवंतों ने बावन जिनालय में विराजमान आचार्य पुण्यरत्न सूरीश्वरजी म.सा.को वंदन किया व नवकार पार्श्वनाथ जिनालय-गुरुमंदिर दर्शन करते हुए चातुर्मास स्थल नूतन थराद भवन जयन्तगिरि से अग्रवाल ग्राउंड में धर्मसभा हुई जहाँ पूज्य श्री का प्रवचन एवं चातुर्मास में होने वाली अनुष्ठानों की घोषणा हुई।उन्होंने विस्तार से चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डाला। मुनि श्री के 25 वर्षीय संयम जीवन का यह द्वितीय स्वतंत्र चातुर्मास है।

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