युवाओं को टीबी के प्रति जनजागरूकता का दूत बनने का राज्यपाल का आह्वान

टीबी मुक्त मुंबई के लिए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की भवन कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ जनजागरूकता पदयात्रा


मुंबई :-
क्षय रोग (टीबी) केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या भी है। टीबी मुक्त मुंबई के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं को आगे आकर जनजागरूकता का दूत बनना चाहिए, यह आह्वान महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया। भवन कॉलेज, अंधेरी पश्चिम में मुंबई विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), बृहन्मुंबई महानगरपालिका और भवन कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘टीबी मुक्त मुंबई जनजागरूकता पदयात्रा’ में राज्यपाल सहभागी हुए।

इस अवसर पर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश का भविष्य केवल सरकारी कार्यालयों में नहीं, बल्कि स्कूलों-महाविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और युवाओं के कार्यों से आकार ले रहा है। विद्यार्थियों को अपने करियर के साथ-साथ एक मजबूत और संवेदनशील समाज के निर्माण की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए। अच्छे समाज के बिना व्यक्ति का उज्ज्वल भविष्य संभव नहीं है।

टीबी मुक्त समाज के लिए जनजागरूकता आवश्यक
टीबी का पूर्ण उपचार संभव है। लेकिन आज भी अनेक नागरिकों में इस बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होने तथा सामाजिक कलंक के भय के कारण मरीज बीमारी को छिपाते हैं। इसलिए समय पर जांच, उचित उपचार और दवाओं के नियमित सेवन के बारे में जनजागरूकता आवश्यक है। सरकार की ओर से टीबी मरीजों के लिए जांच, दवाइयों और पोषण सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिकों को इन सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए, ऐसा आह्वान राज्यपाल ने किया।

टीबी मुक्त मुंबई के लिए केवल सरकारी तंत्र के प्रयासों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। विद्यार्थियों को अपने परिवार, कॉलेज, आसपास के क्षेत्र और समाज में टीबी के प्रति सकारात्मक संदेश पहुंचाना चाहिए। ‘डरें नहीं, जांच कराएं, उपचार लें और स्वस्थ जीवन जिएं’ यह संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का उन्होंने आह्वान किया।
संवेदनशील नागरिकों के निर्माण की आवश्यकता
समाज के निर्माण के लिए संवेदनशील नागरिकों की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े आर्थिक योगदान से अधिक समय, सहानुभूति और सामाजिक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। समाज के प्रत्येक वर्ग के सुख-दुःख की चिंता करना ही एक अच्छे नागरिक की पहचान है, राज्यपाल ने कहा।

उन्होंने युवाओं के सामने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक और बढ़ते स्क्रीन टाइम जैसी नई चुनौतियों का भी उल्लेख किया। ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक प्रगति पर नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सामाजिक प्रतिबद्धता पर भी आधारित होना चाहिए। वर्ष 2047 के विकसित भारत की मजबूत नींव रखने की जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी पर है, उन्होंने कहा।

राज्यपाल ने कहा कि ‘क्रांति का अर्थ सकारात्मक परिवर्तन है।’ किसी एक व्यक्ति का जीवन बदलना भी एक छोटी क्रांति है और ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा सामाजिक परिवर्तन संभव है।

‘टीबी मुक्त मुंबई’, ‘नशामुक्त महाराष्ट्र’ और लुप्त होती कलाओं का संरक्षण
— राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे

राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे ने कहा कि राज्यपाल ने पदभार ग्रहण करने के बाद नागरिकों की सहभागिता के लिए ‘टीबी मुक्त मुंबई’, ‘नशामुक्त महाराष्ट्र’ और लुप्त होती कलाओं का संरक्षण—इन तीन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं को सहभागी बनाकर जनजागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाना है।

टीबी एक रोकथाम योग्य और उपचार से पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है तथा समय पर निदान और उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। युवाओं को अपने परिवार, कॉलेज, आसपास के क्षेत्र और सोशल मीडिया के माध्यम से टीबी के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए और स्वास्थ्य जागरूकता के दूत बनना चाहिए, ऐसा आह्वान डॉ. नारनवरे ने किया।

युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए
— अभिनेता अपारशक्ति खुराना

अभिनेता अपारशक्ति खुराना ने टीबी मुक्त मुंबई पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘नशे को ना कहना’ प्रत्येक व्यक्ति की मूल जिम्मेदारी है। मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने का सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें नशे से दूर रहने की सीख दी, जिसका उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। युवाओं को नशे से दूर रहकर अपने भविष्य के लिए सही निर्णय लेना चाहिए। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के कार्य तथा व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों पर भी पड़ता है।

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति का विवेक नष्ट करता है। इसलिए युवाओं को अपने जीवन को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों से दूर रहना चाहिए।

सामाजिक उपक्रमों में सहभागी होने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को बेहतर और अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए सभी को अपना योगदान देना चाहिए।

इस अवसर पर मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) रवींद्र कुलकर्णी, प्रति-कुलगुरु डॉ. अजय भामरे, कुलसचिव डॉ. प्रसाद कारंडे, भवन कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष एडवोकेट आसिफ मुल्ला, भवन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) सविता पवार, अभिनेता अपारशक्ति खुराना, मेघाश्रेय फाउंडेशन की संस्थापक सीमा सिंह सहित शिक्षकगण, एनएसएस स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट्स और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के बाद राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने भवन कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ टीबी मुक्त मुंबई जनजागरूकता पदयात्रा में सहभागिता की। विद्यार्थियों ने टीबी के प्रति जनजागरूकता के संदेश देते हुए समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश पहुंचाया।

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