आशापुरी की जैन धरोहर को मिलेगा नया जीवन, संरक्षण कार्य की तैयारी तेज
4.5 मीटर विशाल जैन प्रतिमा होगी संरक्षित एवं पुनःस्थापित, तीन चरणों में होगा विकास कार्य
40 लाख के बजट से आशापुरी में जैन धरोहर संरक्षण कार्य जल्द शुरू
JHPC की पहल रंग लाई : आशापुरी में जैन धरोहर संरक्षण कार्य जल्द होगा शुरू
मंडीदीप | रायसेन जिले के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के आशापुरी-सतमसिया जैन मंदिर समूह की प्राचीन जैन धरोहर के संरक्षण की दिशा में अब ठोस पहल जमीन पर दिखाई देने लगी है। जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC), सर्वोदय सामाजिक संस्था (पंजी.), मध्यप्रदेश द्वारा लगातार उठाए जा रही मांग के बाद आशापुरी में प्रस्तावित संरक्षण कार्यों को लेकर पुरातत्व विभाग की टीम ने बुधवार को स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुरातत्व विशेषज्ञ एवं आशापुरी परियोजना प्रभारी श्री रमेश यादव के नेतृत्व में टीम ने पूरे परिसर का जायजा लिया, आवश्यक माप-जोख की तथा वहां मौजूद प्राचीन मंदिर अवशेषों, विशाल जैन तीर्थंकर प्रतिमा एवं अन्य पुरातात्विक सामग्री का निरीक्षण किया। विभागीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार संरक्षण कार्य आगामी माह से चरणबद्ध रूप से प्रारंभ किए जाने की संभावना है।
तीन चरणों में प्रस्तावित है संरक्षण कार्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रस्तावित कार्य के पहले चरण में परिसर की सफाई, प्राचीन मंदिर के चबूतरे एवं गर्भगृह क्षेत्र की वैज्ञानिक पुरातात्विक जांच/उत्खनन तथा आवश्यकतानुसार पैदल मार्ग का विकास किया जाएगा। उत्खनन के दौरान यदि भूमिगत प्राचीन जैन मंदिर या अन्य महत्वपूर्ण संरचनात्मक अवशेष प्राप्त होते हैं, तो उन्हें पुरातात्विक मानकों के अनुरूप संरक्षित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
दूसरे चरण में लगभग 4.5 मीटर ऊंची विशाल जैन तीर्थंकर प्रतिमा का विशेषज्ञों की देखरेख में वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा। प्रतिमा की स्थिति एवं मूल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संरक्षण-लेपन की प्रक्रिया अपनाने के बाद उसे उसके मूल स्थान पर मूल कायोत्सर्ग मुद्रा में पुनःस्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। जहां संभव होगा, मूल प्राचीन चरणपीठ/चरणपद तथा उपलब्ध मूल पत्थरों का भी पुरातात्विक परीक्षण एवं उपयुक्त उपयोग किया जाएगा। तीसरे चरण में परिसर की सुरक्षा एवं पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऊंची सुरक्षा दीवार, सड़क निर्माण, परिसर का समतलीकरण, पार्किंग, बड़े मुख्य प्रवेश द्वार एवं सुरक्षा व्यवस्था विकसित किए जाने की योजना है।
पुरातत्व विभाग के संचालक एवं उप संचालक की पहल की सराहना
जैन धरोहर संरक्षण परिषद ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग के संचालक श्री मदन कुमार (IAS) की संवेदनशील पहल की सराहना की है। परिषद ने कहा कि विभागीय स्तर पर इस ऐतिहासिक धरोहर को गंभीरता से लेते हुए संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
परिषद ने विशेष रूप से उप संचालक श्रीमती डॉ. मनीषा शर्मा की सक्रियता, तत्परता और संवेदनशील कार्यशैली की सराहना करते हुए उनका विशेष आभार व्यक्त किया। परिषद के अनुसार, डॉ. शर्मा ने आशापुरी की इस महत्वपूर्ण जैन धरोहर के विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप करीब 40 लाख के पहले बजट आवंटन के साथ विभागीय टीम द्वारा आज दूसरी बार स्थल निरीक्षण भी किया गया है।
JHPC प्रतिनिधियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
निरीक्षण के दौरान जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC) के इंजीनियर अजित कुमार जैन एवं राजीव जैन (भास्कर) भी उपस्थित रहे। उन्होंने परिषद की मंशा एवं संरक्षण संबंधी दृष्टिकोण से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया तथा प्राचीन अवशेषों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, प्रतिमा के मूल स्वरूप के संरक्षण, उपलब्ध प्राचीन पत्थरों के उचित परीक्षण एवं उपयोग तथा पूरे परिसर के व्यवस्थित संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।परिषद ने स्पष्ट किया कि तकनीकी एवं पुरातात्विक कार्य विभागीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए तथा JHPC की भूमिका सहयोग, सुझाव एवं जनभागीदारी के रूप में रहेगी।
“धरोहर बचेगी, इतिहास बचेगा”
सर्वोदय के अध्यक्ष पंकज जैन ने कहा कि आशापुरी केवल एक प्राचीन स्थल नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं जैन विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशाल जैन तीर्थंकर प्रतिमा सहित यहां बिखरे मंदिर अवशेषों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को सुरक्षित रखने का कार्य होगा।परिषद ने संचालक श्री मदन कुमार (IAS), उप संचालक डॉ. मनीषा शर्मा तथा वरिष्ठ पुरातत्व विशेषज्ञ एवं परियोजना प्रभारी श्री रमेश यादव सहित पूरे पुरातत्व विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आशापुरी की धरोहर के संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम स्वागतयोग्य है।
जैन धरोहर संरक्षण परिषद (JHPC) — सर्वोदय सामाजिक संस्था (पंजी.), मध्यप्रदेश ने संकल्प दोहराया कि धरोहर बचेगी, इतिहास बचेगा” की भावना के साथ प्राचीन जैन एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में विभाग एवं प्रशासन का सहयोग करना है।

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