श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन संघ, को अष्टमंगल अर्पण

अष्टमंगल से होगी मंदिर के साधारण खाते में वृद्धि - साध्वी सौम्यकला - बंबोरी परिवार ने लिया लाभ


भायंदर :-
गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सुरीश्वरजी म.सा. व गच्छाधिपति आचार्य कुलचंद्र सुरीश्वरजी (KC) म. सा के आशीर्वाद से श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन संघ संचालित भायंदर के प्रथम ऐसे श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर को अर्पण किया गया।

यह आयोजन संघ के तत्वावधान में व गच्छाधिपति आचार्य विजय धर्म धुरंधर सुरीश्वरजी म. सा.की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी सौम्यकला श्रीजी आदि ठाणा की निश्रा में हुआ।इसके लाभार्थी परिवार रमेश बंबोरी परिवार ने  मोहनराजजी डी बंबोरी / सोहनबाई मोहनराजजी बंबोरी , सादड़ी के दिव्य आशीष से वो अ . सौ.शकुंतला रमेश बंबोरी व वीणा दीपक बंबोरी के चौदह पूर्व की तपस्या पूर्ण होने पर संघ को अर्पण किया। बंबोरी परिवार के निवास स्थान से उपाश्रय पंहुचने पर विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी सौम्यकला ने कहा कि जैन धर्म में अष्टमंगल 8 सबसे पवित्र और मांगलिक चिन्ह होते हैं। कोई भी शुभ कार्य, पूजा, स्थापना या अर्पण इनके बिना अधूरा माना जाता है।

उन्होंने कहा कि ये 8 चिन्ह हमें मोक्ष के मार्ग की याद दिलाते हैं,जिसमें प्रथम स्वस्तिक - शांति और चार गतियों का प्रतीक - देव, मनुष्य, तिर्यंच और नरक से मुक्ति।दूसरा श्रीवत्स भगवान के हृदय पर स्थित चिन्ह। यह अनंत करुणा और विशुद्ध प्रेम का प्रतीक है।तीसरा नंदावर्त बड़ा स्वस्तिक। यह भव्यता और उच्च आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है, जिससे मोक्ष का द्वार खुलता है।चौथा वर्धमानक / सम्पुट- दीपक जैसी आकृति वाला पात्र। यह धन, वृद्धि और सांसारिक दुखों के नाश का प्रतीक है।पांचवां भद्रासन / सिंहासन - भगवान के बैठने का पवित्र आसन। यह सर्वोच्च पद और जगत के कल्याण का प्रतीक है।6 ठा कलश - मंगल कलश ज्ञान रूपी अमृत से भरा हुआ, यह पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है।सातवां दर्पण आत्म दर्शन का प्रतीक। जैसे दर्पण में अपना रूप दिखता है, वैसे ही हमें अपने आत्म-स्वरूप को देखना चाहिए व आठवा मत्स्य युगल / मीन युगल- दो मछलियों का जोड़ा। संसार रूपी सागर से पार होने और जीवन की चंचलता पर नियंत्रण का प्रतीक है।

उन्होंने इसके महत्व को समझाते हुए कहा कि जब श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन संघ को अष्टमंगल अर्पण किया जाता है, तो इसका अर्थ है - हम प्रभु को यही प्रार्थना कर रहे हैं कि हमारे जीवन में, संघ में और परिवार में हमेशा मंगल बना रहे, विघ्न दूर हों और सभी जीवों को धर्म का मार्ग मिले।अष्टमंगल घर में, मंदिर में और शुभ प्रसंगों पर अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।इस अवसर पर शहर की पहली महिला विधायक गीता जैन सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।


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