जैन विश्वभारती संस्थान में ‘जैन शिक्षण संस्थान परिसंवाद 2026’ का आयोजन

आधुनिक तकनीक के साथ जैन ज्ञान-परंपरा के समन्वय की आवश्यकता : प्रो. बच्छराज दूगड़


लाडनूं :-
जैन विश्व भारती संस्थान, लाडनूं के जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के तत्वावधान में ‘जैन शिक्षण संस्थान परिसंवाद 2026’ का आयोजन किया गया। परिसंवाद का मुख्य विषय ‘जैन अध्ययन का भविष्य एवं जैन संस्थाओं की भूमिका : वर्तमान परिप्रेक्ष्य में’ रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की। मुख्य अतिथि डॉ. शांति कुमार पाटिल, प्राचार्य, श्री टोडरमल दिगंबर जैन सिद्धांत महाविद्यालय, जयपुर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल कुमार जैन, संयुक्त सचिव, जैन एकेडमी ऑफ स्कॉलर्स (जेएएस), अहमदाबाद रहे। विषय-प्रवर्तन डॉ. समणी अमल प्रज्ञा ने किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. बच्छराज दूगड़ ने जैन अध्ययन को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने, शोध को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के साथ जैन ज्ञान-परंपरा के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने जैन दर्शन, साहित्य, संस्कृति एवं अहिंसा की समकालीन प्रासंगिकता तथा जैन अध्ययन की भावी संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए 

मंगल गान के पश्चात अतिथि-सम्मान एवं परिचय का क्रम हुआ। परिसंवाद में जैन अध्ययन, जैन संस्कृति के संवर्धन तथा चरित्र निर्माण एवं अहिंसा विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विद्वानों एवं प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। अंत में संवाद एवं विचार-विमर्श के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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