निपुणरत्न विजयजी व जापानी भक्तों को दर्शन सागरजी की कृति भेट
गुरु बिन जीवन अधूरा हैं
भायंदर :- श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ में चातुर्मास हेतु बिराजमान पूण्य सम्राट परम पूज्य आचार्य श्री विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा.के शिष्य रत्न ,प्रखर प्रवचनकार,मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी व पर्व पर्युषण की आराधना करने आये जापानी भक्तों को गुरु दर्शन सागर सूरीश्वरजी म.सा.के जीवन पर पुस्तक मेरे गुरुवर,दर्शन सागर गागर में सागर प्रदान की।
भायंदर (वेस्ट) के थराद भवन में पुस्तक की लेखिका संगीता बागरेचा,बाफना (संगी) ने पुस्तक गुरुदेव व जापान की तुलसी जैन को प्रदान की।इस अवसर पर निपुणरत्नजी ने कहा कि गुरु का महत्व सिर्फ ज्ञान देने में नहीं, दृष्टि देने में है।उन्होंने कहा कि 'गु' का अर्थ है अंधकार, 'रु' का अर्थ है प्रकाश। जो आपके भीतर के अज्ञान, भ्रम और अहंकार के अंधकार को हटाकर ज्ञान का दीपक जलाए, वही गुरु है।तुलसी जैन ने कहा कि ज्ञान तो किताबों में भी है, पर बोध गुरु से मिलता है,तो लेखिका ने कहा कि गुरु आइना है ।माता-पिता शरीर देते हैं, गुरु जीवन का अर्थ देते हैं। वो आपके दोष नहीं गिनाता, आपको आपका स्वरूप दिखा देता है। इसीलिए कबीर न कहा है कि ,गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।। इस अवसर पर युथ फोरम के अध्यक्ष दीपक जैन भी उपस्थित थे।

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