स्वच्छता से आत्मशुद्धि:जापानी बौद्ध भिक्षुओं की अनुशासित जीवनशैली

 बोद्ध धर्म में अहिंसा को सर्वोच्च स्थान

सुगालचन्द जैन, चेन्नई


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पान के 'जोडो शिन्शु हिगाशी होंगानजी' सम्प्रदाय (कोम्यो-जी मंदिर, टोक्यो) के बौद्ध भिक्षु शौकेई मात्सुमोतो (Shoukei Matsumoto) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "A Monk’s Guide to a Clean House and Mind" में स्वच्छता और बौद्ध जीवनशैली के गहरे संबंधों को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।

बौद्ध दर्शन में अहिंसा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। भिक्षुओं के लिए स्वच्छता केवल एक भौतिक कार्य नहीं, बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा की शुद्धि का एक सशक्त माध्यम है।

1. स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता

भिक्षु अपने निवास स्थान, मंदिर परिसर, रसोई, स्नानघर और शौचालय की सफाई स्वयं करते हैं। कपड़े धोने से लेकर भोजन पकाने तक के कार्य वे खुद संभालते हैं। स्वावलंबन का यह अभ्यास व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दूसरों पर निर्भर होने से बचाता है।

2. ध्यान का एक रूप: स्वच्छता

सफाई करते समय भिक्षुओं का पूरा ध्यान केवल उसी कार्य पर केंद्रित रहता है। इस प्रक्रिया में मन शांत होता है, विचार केंद्रित होते हैं और व्यक्ति प्रकृति के अधिक निकट महसूस करता है। यहाँ *सफाई* केवल झाड़ू-पोछा नहीं, बल्कि एक *जीवंत ध्यान* (Meditation) है।

3. प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता

नियमित स्वच्छता से छोटे-छोटे जीव-जंतुओं की *अनावश्यक उत्पत्ति* नहीं होती, जिससे अंजाने में होने वाली *हिंसा* रुकती है। भिक्षु जल का अपव्यय रोकते हैं और पौधों की देखभाल को भी अपनी साधना का हिस्सा मानते हैं।

4. बाह्य सफाई से आंतरिक निर्मलता

जैसे हम घर से कचरा बाहर फेंकते हैं, वैसे ही सफाई के दौरान *मन* में जमा क्रोध, अहंकार, मोह और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। बाहरी स्वच्छता वास्तव में विचार और हृदय की निर्मलता का प्रतीक है।

5. अनुशासित एवं संयमित दिनचर्या

भिक्षु सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही सफाई का कार्य पूरा करते हैं। सात्विक शाकाहारी भोजन, समय पर आहार और बर्तनों को तुरंत साफ करके सही स्थान पर रखना- उनकी *अनुशासित दिनचर्या* का *मूल आधार* है।

हमारे लिए संदेश

स्वच्छता किसी एक वर्ग या सफाईकर्मी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। जब हम अपने आसपास की सफाई करते हैं, तो हमारा मन भी निर्मल और संवेदनशील बनता है।

जापानी भिक्षुओं की यह जीवनशैली भारतीय परंपरा और जैन दर्शन के अहिंसा, अपरिग्रह स्वावलंबन और जीवदया जैसे शाश्वत मूल्यों का सुंदर स्मरण कराती है।

सौजन्य: A Monk’s Guide to a_ _Clean House and Mind-_ _Shoukei Matsumoto_

सुगालचन्द जैन, चेन्नई

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