ऋषभ एवं राम की ऐतिहासिकता पर चर्चा
आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक संपन्न
अयोध्या :- श्री आदिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक पर अनेक आयोजन संपन्न हुए.अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ एवं समन्वय वाणी के संयुक्त तत्वावधान मे झूम पर वेबीनार का आयोजन हुआ जिसमे संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन(एडवोकेट) ने दीप प्रज्वलन कर एवं मंगलाचरण से हुआ।झूम पर हुए इस चर्चा सत्र में देश विदेश से लोग जुडे।वक्ताओ मे डॉ एन के. खींचा,डॉ साधना सिंघवी,डॉ रीना जैन,डॉ नीलम जैन,डॉ शैलेंद्र जैन,डॉ संध्या जैन'श्रुति',डॉ पारसमणि खींचा,डॉ राजेंद्र गुलेच्छा,डॉ स्वतंत्र जैन,डॉ अल्पना जैन,डॉ अल्फ़ा जैन,डॉ अलका जैन,डॉ बी एल सेठी आदि ने प्रमुख रूप से अपने विचार प्रस्तुत किए. महामंत्री डा अखिल बंसल ने आभार व्यक्त किया. संचालन डॉ ममता जैन ने किया।
इसी क्रम मे श्रमण संस्कृति महोत्सव के रूप मे पुष्पा पाण्या जी ने ऋषभ जयंती से महावीर जयंती तक बीस दिन का झूम पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन हुआ जिसमे प्रथम दिन 5अप्रैल को पं रतनलाल जी एवं डॉ संजय सोनवानी नेभगवान ऋषभदेव पर अपने विचार प्रस्तुत किए.दूसरे दिन का विषय अयोध्या आदि से अनंत तक था ।भारतीय दिगंबर जैन महासभा के अध्यक्ष निर्मल कुमार सेठी ने दीप प्रज्वलन कर अपने वक्तव्य मे आयोजक पुष्पाजी का आभार प्रकट किया व कहा कि ऐसे करोना काल मे इस तरह की वेबीनार होती रहनी चाहिए इससे जानकारी और जागरूकता तो बढती ही है एसे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।डॉ प्रभाकिरण जैन जी ने अपनी पुस्तक( मेरी सखि अवधपुरी अयोध्या) की कुछ पक्तियो का काव्यपाठ किया ।
डॉ संगीता सिंह ने कहा कि अयोध्या श्रीराम के साथ ही पांच तीर्थंकरो की जन्मभूमी है और जैन साहित्य मे अयोध्या की महिमा वर्णन जितना है उतना अन्य धर्मो के साहित्य मे नही।श्री आदिनाथ स्मृति केंद्र के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन अयोध्या से प्राप्त मूर्तियो एवं अन्य ऐतिहासिक तथ्यो से ऋषभ एवं राम की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला बताया कि 11वी सदी मे शाहजूरण ने आदिनाथ के जन्म स्थान पर बने विशाल जिनालय को ध्वष्त कर मस्जिद का निर्माण कराया पर कुछ समय पूर्व मस्जिद के पीछे चरण स्थापित हुए जो आज भी है।रामकोट के राममंदिर को तोडने की धटना 15सदी की है मीर बाकी द्वारा।तीर्थंकरो की टोके अभी भी है कई मंदिर।7 का विषय भरत का भारत है जिष पर डा अनेकांत जैन अपने वक्तव्य मे प्रमाणो द्वारा भारतवर्ष नामकरण पर विस्तार से चर्चा करेगे।इसी तरह अन्य विषयो पर भी क्रम से विद्वदजन अपने विचार प्रस्तुत करेगे।

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