मानवसेवा ही लक्ष्य हैं दिलीपकुमार कांतिलाल राठौड़ के लिए

शिक्षा, चिकित्सा, अन्नदान आदि कार्यक्रमों का आयोजन 


मुंबई :-
बाली (राजस्थान) निवासी और वर्तमान में दादर (मुंबई) में रह रहे दिलीपकुमार कांतिलाल राठौड़ उन लोगों में से है जिनके जीवन में सेवा भावना बचपन से ही संस्कारों में रची-बसी हैं।पूर्वजों के पुण्यकर्मों की प्रेरणा और आत्मा में बसे करुणा भाव ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन्हें जनसेवा की राह पर पूरी तरह समर्पित कर दिया। लोगों के दर्द और बेबसी को देख उनका हृदय द्रवित हुआ और तभी से उन्होंने निःस्वार्थ सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।

अस्पतालों में पीड़ितों की सहायता हो या शिक्षा से वंचित बच्चों की मदद—हर मोर्चे पर वे तन-मन-धन से जुटे रहते हैं। उन्हें यह समझ है कि छोटे-छोटे बच्चे ही देश का भविष्य हैं और अगर उन्हें शिक्षा व संसाधन न मिले तो देश की नींव कमजोर हो जाएगी।चौथी कक्षा तक पढ़ाई कर जीवन के संघर्ष में मुंबई आकर काम शुरू करने वाले दिलीपजी को आज भी इस बात का अफ़सोस हैं कि वे अधिक पढ़ाई नहीं कर सके। पर उन्होंने यह सुनिश्चित किया हैं कि उनकी यह कमी समाज के अन्य बच्चों के जीवन में न दोहराई जाए।

समय  समय पर  छास वितरण, जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री,फीस में मदद,अस्पतालों में बाहर से आये मरीजों को भोजन देना,थड़ी में शाल,कंबल का वितरण आदि अनेक काम करते आ रहे हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे समाज सेवा को हमेशा उतनी ही प्राथमिकता देते हैं।उनका विश्वास ऊपरवाले पर हैं और अपने बेटों को ही अपनी असली पूंजी मानते हैं।

आज भी वे किसी जरूरतमंद की पुकार सुन आधी रात को भी दौड़ पड़ते हैं। दिलीप राठौड़ जैसे सेवाभावी व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा हैं जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और संवेदना को अपना धर्म बना लिया हैं।

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