श्री मोहनखेड़ा गुरुधाम तीर्थ डहाणु में नवपद औलीजी भव्य रूप से संपन्न

150 से ज्यादा आराधकों ने लिया लाभ -

शताब्दी गौरव के रजत जयंती वर्ष पर दिया आशीर्वाद


डहाणु :-
मुंबई के समीप श्री मोहनखेड़ा गुरुधाम तीर्थ सम डहाणु की पावन भूमि पर चैत्री नवपद औलीजी आराधना का भव्य आयोजन किया गया।

श्री पार्श्वनाथ राजेन्द्र सूरि जैन चेरीटेबल रिलिजियस ट्रस्ट के तत्वावधान में 15 से 24 अप्रैल तक औलीजी परोपकार सम्राट, मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा के आज्ञानुवर्ति सुशिष्य वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा.,मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.,आदि ठाणा की निश्रा में एवं साध्वीश्री इन्दुयशा श्रीजी की पावन उपस्थिति मे संपन्न हुई। नियमित आयोजित धर्मसभा में प्रखर प्रवचनकार श्री रजतचंद्र विजयजी ने औलीजी पर विस्तार से इसके महत्व को समझाया। आराधना के दौरान प्रतिदिन मंगलमय पूजन एवं महापूजन हुए जिसमें त्रिदिवसीय 45 आगम महापूजन महोत्सव धूमधाम से संपन्न किया गया। संपूर्ण राल पट्टी में यह सर्वप्रथम मौका था जिसमें 45 आगम का आत्म कल्याणकारी महापूजन पढाया गया। सैकड़ो लोगों ने इसका लाभ लिया और कई आराधको ने तो जीवन में पहली बार ऐसा पूजन देखा। 

चैत्र सुदी तेरस के दिन शासन नायक महावीर प्रभु का यशस्वी यादगार जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। प्रासंगिक प्रवचन महाभिषेक आयोजन किया गया। संयम उत्सव वधामना के अंतर्गत मुनिराज श्री पीयूषचंद्र विजयजी के 33 वे संयम वर्ष प्रवेश के अवसर पर लाभार्थी परिवार सहित संपूर्ण आराधक श्रीसंघ ने अक्षत से वधामना किया केसर छांटने व कामली अर्पण की एवं गुरुपूजा की। इस लम्हे को देखकर लोगों ने संयम की अनुमोदना जयकारों से की । स्मरण रहे श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा.को पांचवा वर्षितप चल रहा जिसका पारणोत्सव 10 मई 2024 को गुरुधाम तीर्थ डहाणु में होगा। चैत्र पूर्णिमा पर्व पर 4 घंटे तक विशिष्ट क्रिया आराधकों ने की इसमें महिलाओं की बड़ी संख्या उपस्थित थी। कई आराधक बच्चे पहली बार आराधना से जुड़े। 

इस तीर्थ के नैसर्गिक वातावरण से सभी लोग अभिभूत हुए और बार-बार इस पावन भूमि पर आने का संकल्प लिया। प्रतिदिन स्नात्र पूजन महापूजन एवं भक्ति भावना के लिए मध्यप्रदेश के नागदा की सुप्रसिद्ध दिलीपभाई एंड पार्टी ने भक्ति की धूम मचाई। महोत्सव के दौरान सिद्धचक्र महापूजन श्री राजेंद्रसूरि गुरुपद पूजन महाआरती के आयोजन किए गए। 9 दिन तक अलग-अलग अनुपम विशिष्ट प्रकार की अंगरचना की गई। भक्तामर एवं गुरु चालीसा का पाठ तथा ढाई घंटे तक प्रवचन धारा बंधु बेलडी़ के श्रीमुख से सुनकर लोग आनंदित हो गए। पहली बार धर्म का मर्म इतने विस्तार से बंधु बेलडी़ गुरु भगवंतों ने समझाया 

तपस्वियों के औलीजी का पारणा 24 अप्रैल को देशभर से पधारे गुरुभक्तों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।औलीजी के संपूर्ण लाभार्थी परिवार भूती (राज.) निवासी स्व. श्रीमती बदामीबाई बाबुलालजी जेठमलजी मगराजजी लिलाबेन पुनमिया परिवार थे। भारतभर के 150 से ज्यादा गुरुभक्तों ने औलीजी आराधना का लाभ लिया।इस अवसर पर मगराजजी पुनमिया को गुरुदेव ने तीर्थ का नया ट्रस्टी घोषित किया।इस अवसर पर रजतचंद्र विजयजी ने शताब्दी गौरव की प्रशंसा की।अखबार के संपादक सिद्धराज लोढ़ा का संघ की और से अभिनंदन किया गया। 

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