मन को आध्यात्मिक करें, बीमारी पर विजय पा लेंगे : मुनि प्रमाण सागर
बिमारी आयी हैं तो जाएगी ही
पारसनाथ (झारखंड) :- यह त्रासदी भरा काल है। अस्पताल भरे पड़े हैं। मन को मजबूत बनाओ। बीमारी आई है तो जाएगी भी, यह अल्पकालिक है। अपने भीतर मन को आध्यात्मिक करें और सोचें कि बीमारी तन को है, मन को नहीं। आप इस पर विजय पा लेंगे।
उपरोक्त विचार आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य प्रखर प्रवचनकार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने पॉजीटिविटी अनलिमिटेड व्याख्यान श्रंखला के पहले दिन कहीं। उन्होंने कहा कोरोना हुआ इसका मतलब मौत आ गई इस बात को मन से निकाल दो। मन को अच्छा और मजबूत रखो तो इस बीमारी को आप चुटकियों में हरा सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं की 85% लोगों को पता ही नहीं चलता की बीमारी आई है और चली गई। हल्के-फुल्के लक्षण रहते हैं, लोगों को पता चलता है। अस्पताल जाते हैं लेकिन संक्रमित होने के बाद अपने मन को मजबूत रखना होगा। यह सोचे कि मैं ठीक हो जाऊंगा और मरीज ठीक भी हो जाते हैं। मुनिश्री ने कहा तन की बीमारी के सब इलाज हैं,परंतु मन की बीमारी का कोई इलाज नहीं है। तन की बीमारी को मन पर हावी नहीं होने दें। जिनका मनोबल ऊंचा होता है क्रिटिकल होते हुए भी जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। जो मरीज मनोबल से कमजोर होते हैं उनकी मौत हो जाती है।
मुनिश्री ने कहा एक मरीज का ऑक्सीजन लेवल 40 था और लंग्स 80% संक्रमित थे लेकिन उसका मनोबल बहुत शानदार था और वह 10-12 दिन में ही स्वस्थ हो गया।
उन्होंने कहा कि मन को मजबूत बनाओ अपने अंदर की जीवसा को जागृत करो कि हमें जीना है। मुनिश्री ने कहा शरीर का जन्म और मरण होता है, आत्मा का नहीं। आत्मा अजर अमर है। मन को मजबूत बनाइए बीमारी आई है तो जाएगी। एक बात गांठ बांध लो कि जब तक आपकी आयु है तब तक आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और आयु पूरी होने पर आपको कोई नहीं बचा सकता। जाने का नंबर है तो कोई स्वस्थ व्यक्ति भी चला जाता है और जिनकी आयु शेष है वे महीनों वेंटिलेटर पर रहने के बाद भी ठीक होकर घर चले जाते हैं। निर्विकल्प होकर के आपको जीवन जीना है।
वैश्विक आपदा मानकर जो संभव हो, हाथ आगे बढ़ाकर समाज को काम करना होगा
मुनिश्री ने कहा ज्यादातर लोग ठीक हो रहे हैं। मृत्यु की दर भी कम है। सावधानी रखें। सेफ जोन में रहें। बस भय का भूत आप को भगाना होगा।।महामारी का खौफ भगाना होगा। कई बार महामारी आई हैं, करोड़ों लोग मौत के मुंह में गए हैं। परंतु मानवता आज भी जिंदा है और जब तक मानवता जिंदा है, हम फिर उठकर खड़े हो जाएंगे। हमें समझने की जरूरत है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया /रामगंजमंडी

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