पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में आज भी सक्रिय नवीन कुमार
राष्ट्रीय स्तर पर हिदी पत्रकारिता और साहित्य के ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व
नवीन कुमार हिदी पत्रकारिता और साहित्य के ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व हैं, जिनकी पहचान कर्म, सादगी और संवेदनशील लेखन से बनी है. पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को अनेक संस्थाओं ने आत्मीय भाव से सम्मानित किया है. सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर के रूप में अपने संस्थान से प्राप्त सम्मान उनके पत्रकारिता जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धि रही है. नवीन कुमार की अब तक दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं-'वेश्या की बेटी' और 'ऑपरेशन सिंदूर' दोनों पुस्तकों का प्रकाशन न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन द्वारा किया गया है. वेश्या की बेटी एक कहानी-संग्रह है, जिसमें 25 कहानियां संकलित हैं. इस कहानी-संग्रह की प्रस्तावना प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लिखी है।उन्होंने लिखा है कि कहानीकार विषय चयन को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं और वेश्या की बेटी, जीवन बाबू, सालगिरह, सुमेधा की जिद, रंगभेद तथा बंद कर दो दरवाजा जैसी कहानियां पाठक को सोचने के लिए विवश करती हैं। उनकी दूसरी पुस्तक 'ऑपरेशन सिंदूर' पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और भारतीय सैन्य बलों द्वारा पाकिस्तान और आतंकवादियों के विरुद्ध चलाए गए अभियान पर आधारित है। यह पुस्तक केवल एक सैन्य अभियान का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना, साहस और सुरक्षा चेतना का दस्तावेज भी है। वेश्या की बेटी और ऑपरेशन सिंदूर दोनों पुस्तकों को राष्ट्रीय स्तर पर पाठकों की सराहना प्राप्त हुई है.
नवीन कुमार का जन्म 1962. खगड़िया में व शिक्षा बिहार से स्नातक, कला व्यवसायः पत्रकारिता, के अलावा कहानी-कविता और लेखन भी करते हैं।उनका मानना है कि अनुभवों की शाब्दिक अभिव्यक्ति ही साहित्य है। नवीन कुमार का साहित्य से जुड़ाव बचपन से रहा हैं। उन्हें कविताएं लिखने का शौक था और पिता का निरंतर प्रोत्साहन मिला। विद्यालय और महाविद्यालय के हिंदी शिक्षकों के सान्निध्य ने उनकी साहित्यिक दृष्टि को मजबूत किया।दृष्टि और अवकाश जैसी पत्रिकाओं में उनकी कविताएं प्रकाशित हुईं. बाद में सारिका के संपादक अवध नारायण मुद्गल द्वारा ग्रामीण अंचलों के नवोदित साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के अभियान के दौरान उनकी लघुकथाएं भी प्रकाशित हुईं। जयप्रकाश आंदोलन से प्रभावित होकर वे साहित्य से पत्रकारिता की ओर मुड़े, लेकिन किसी विचारधारा के कट्टर आग्रह में नहीं बंधे. उन्होंने अखबार के लिए आंचलिक पत्रकारिता की, प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेखन किया और हिंदी पत्रकारिता के प्रतिष्ठित अखबार से जुड़ने के लिए मुंबई आए।
मुंबई में उन्होंने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़कर पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी।वहीं कई समाचार पत्रों में हिंदी के लिए स्वतंत्र लेखन किया और सिनेमा की भौतिकवादी दुनिया पर भी स्तंभ पत्रकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। साढ़े तीन दशक से मुंबई में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे नवीन कुमार को कोरोना काल ने फिर साहित्य की ओर लौटाया। उनका मानना है कि पत्रकारिता के साथ साहित्य की गहरी संवेदनशील रचना करना कठिन अवश्य है, लेकिन जब अनुभव शब्दों में बदलते हैं, तब वही साहित्य बन जाते हैं।

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