संदेश

पालिताणा में पहली बार सभी जैनाचार्यों मुनि भगवंतों का स्नेह मिलन हुआ

चित्र
एक तिथि पर विश्वास किया पालिताणा :- जैनियों के शाश्वत तीर्थ श्री शत्रुंजय गिरिराज की गोद में महापर्व पर्युषण की आराधना, शानदार पूजा अर्चना,  विभिन्न प्रकार की तपस्याएँ, पूजा-अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए। एक तिथि पर विश्वास किया पालीताणा में रहने वाले विभिन्न समुदायों के कई आचार्य भगवंतों, संतों का जम्बूद्वीप उपाश्रय में प्रेमपूर्वक मिलन हुआ। श्री अशोकसागर सूरीश्वरजी म.सा. शत्रुंजय गिरिराज के प्रांगण में आयोजित इस स्नेह मिलन में पालीताणा तीर्थ की रक्षा, गौरक्षा,जीवदया, तीर्थों के वैभव से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही तीर्थयात्रीयों को जो डोलीवाले यात्रा कराते हैं उन्हें सरकार पहचान पत्र (आयडी) दें व उनका पंजीकरण किया जाना चाहिए ताकि कार्तिक सूद पूर्णिमा से शुरू हो रही तीर्थयात्रा और तीर्थयात्रियों को सुविधा मिल सके। स्नेहमिलन में जम्बूदीप उपाश्रय में वरिष्ठ आचार्य भगवंत एवं मुनि भगवंतों के सान्निध्य में मुनि भगवंतों ने गोचरी आदि से भक्ति की। इस स्नेह मिलन में  पंजाब केसरी विजय वल्लभ सूरीश्वरजी म.सा.समुदाय के गच्छाधिपति,आचार्य श्री नित्यानंद सूरीश्वरज...

कौन बनेगा धर्मशिरोमणि प्रतियोगिता संपन्न

चित्र
डॉ मनीषा जैन ने होस्ट की प्रतियोगिता लाडनूं :-  दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पर्युषण पर्व के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हो रहा है। समाज के मंत्री विकास पांड्या ने बताया कि पर्यूषण पर्व के सातवें दिन उत्तमतप धर्म की पूजा की गई। उन्होंने कहा कि प्राकृताचार्य सुनील सागर महाराज की शिष्या ब्रह्मचारिणी पूर्णिमा जैन ने उत्तमतप धर्म पर उपस्थित सभा को संबोधित किया साथ ही तत्त्वार्थसूत्र के सातवें अध्याय का अर्थ सहित वाचन किया।  पर्यूषण पर्व के अवसर पर दो दिवसीय कौन बनेगा धर्मशिरोमणि (कौन बनेगा करोड़पति के समांतर) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अध्यक्ष अशोक सेठी ने बताया कि यह कार्यक्रम डॉ मनीषा जैन ने होस्ट किया तथा प्रथम दिन सुरेश कुमार, संतु कासलीवाल एवं द्वितीय दिन जैन दर्शनविद् डॉ सुरेंद्र जैन, अर्पित जैन द्वारा सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि दी गई। इस अवसर पर डॉ जैन ने कौन बनेगा धर्मशिरोमणि प्रतियोगिता को होस्ट करते हुए जैन दर्शन से संबंधित विविध प्रश्नावली पूछी। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के लिए 50-50, ऑडियंस कॉल, कॉल अ फ्रेंड हेल्पलाइन रखी गई। जिसे विद्युत उपकरणों के ...

ज्ञान और तप:साधना का अद्भुत संगम है- डॉ. निर्मला बरड़िया

चित्र
लाडनूं की बेटी पूरी दुनिया में छाने के बाद भी अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक साधना के पथ पर रही अडिग लाडनूं। (शरद जैन सुधांशु, लाडनूं) :-  अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक महिला डा. निर्मला बरड़िया की विलक्षण आध्यात्मिक साधना, तीन मासखमण और 11 वर्षीतप हैं उनकी उपलब्धियां, ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है डॉ. निर्मला बरड़िया आधुनिक विज्ञान के उच्च शिखर पर पहुंचने और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने के बावजूद अपनी संस्कृति, धर्म-परम्पराओं और मान्यताओं के साथ आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात् करने की एक विलक्षण मिसाल लाडनूं की बेटी डा. निर्मला बरड़िया ने पेश की है। निर्मला बरड़िया यहां के मालचंद बरड़िया की पुत्री और समाजसेवी भागचंद बरड़िया की भतीजी है। उनका वर्तमान में तीसरी 'मास-खमण' तपस्या चल रही है। इसमें वे लगातार एक महीने तक कोई आहार ग्रहण नहीं करती, केवल जल ग्रहण करके आध्यात्मिक साधना में लीन रहती हैं। इस प्रकार ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है डॉ. निर्मला बरड़िया। साथ ही समाज सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए सहयोग करने में भी उनकी भावना उच्च हैं और इस तरह सहयोग करन...

काका बैप्टिस्टा का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान सदैव प्रेरणादायी रहेगा

चित्र
काका बैप्टिस्टा की 94 वीं पुण्यतिथि भायंदर :- देश के आजादी में योगदान देनेवाले उत्तन गांव के स्वतंत्रता सेनानी काका बाप्टिस्टा को उनकी 94वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए काका बैप्टिस्टा चौक पर एकत्र हुए।ज्ञात हो अंकल बैप्टिस्टा सामाजिक कार्यकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी और होम रूल लीग के अनुकरणीय नेता थे तथा उनके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान सदैव प्रेरणादायी रहेगा। अंकल बैपटिस्टा कहते थे कि "स्वतंत्रता हमारा मूल अधिकार है, इसे पाने के लिए हम सभी को एक साथ आने की जरूरत है।कार्यक्रम में सिटीजन बैंक के निदेशक एवं पूर्व सरपंच  एडविन घोंसाविस ने प्रार्थना की और उपस्थित जनसमूह को काका बैप्टिस्टा के काम के बारे में जानकारी दी। मोबय गावठाण पंचायती के व्हॉल्टर मुझेलो, दर्यावर्दी मंडल के अध्यक्ष लेस्ली भंडारी, वेलेरीन पांड्रीक, एडवर्ड घोन्सालवीस, आल्बर्ट घोन्साल, जॉन गऱ्या, संजय नागोरामा, चंद्रकांत पाटील, विल्यम गोविंद, डॅरल फोन्सेका, डेनिस जिऊ, अलिक डिसोजा, डीनल भगत, मॅकलिन मोंटेरो, शॉन कोलासोऔर अन्य सहयोगियों ने भाग लिया और काका बैप्टिस्टा को श्रद्धांजलि दी।

संस्कारों का प्रतीक बने उत्तर भारतीय भवन :- रामभद्राचार्य

चित्र
 श्री गंगोत्री उत्तर भारतीय भवन का भूमि पूजन  संपन्न भायंदर :- उत्तर भारतीय समाज के वर्षों की प्रतीक्षा और उम्मीदों का सपना साकार हुआ, जब श्री गंगोत्री उत्तर भारतीय भवन के भूमि पूजन  विधिवत रूप से संपन्न हुआ। भूमि पूजन धर्म चक्रवर्ती पद्मविभूषण तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ । स्वामी जी के आशीर्वाद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से इस भवन का निर्माण कार्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विधायक गीता जैन एवम भरत जैन भी पूजा में सम्मिलित हुए। मीरारोड में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामभद्राचार्यजी ने  कहा कि "यह भवन केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह उत्तर भारतीय समाज के एकजुटता, संस्कृति और संस्कारों का प्रतीक बनेगा। यहाँ होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। मैंने इस भवन का भूमिपूजन किया है और मैं ही इस भवन का उद्घाटन करूँगा।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय समाज के लोग और शहर के प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित थे। भवन के नि...

बेहोशी के कारोबार: उधारी का साम्राज्य

चित्र
उधारी के जाल से बाहर निकलना जरूरी भरतकुमार सोलंकी आ ज के व्यापार जगत में ऐसे कई महारथी मिल जाएंगे जो दिन-रात जागते हुए भी असल में बेहोशी में जी रहे हैं। वे आपको बड़े गर्व से बताएंगे कि उनका कारोबार फल-फूल रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि उनकी दुकान, मुनाफे से नहीं, बल्कि उधारी की बैसाखियों पर खड़ी है। इन बेहोश व्यापारी बंधुओं की दुनिया में, मुनाफे का कोई अस्तित्व नहीं, सिर्फ उधार का खेल चलता है। कई वर्षों से यह 'महानुभाव' एक-दूसरे से पैसे मांगकर अपने कारोबार की गाड़ी खींच रहे हैं। दिन में बड़ी-बड़ी बातें, रात को उधारी की गिनती—यही उनकी दिनचर्या है। एक हाथ से उधार लेते हैं, दूसरे हाथ से किसी और को उधार दे देते हैं। अब आप इसे व्यापार कहें या उधारी का साम्राज्य, फर्क कौन समझे! दरअसल, यह उस चूहेदानी जैसा खेल है जिसमें खुद भी फंसे हैं और दूसरों को भी फंसा रहे हैं।  इनसे पूछो कि आपके व्यापार में असली मुनाफा कहां है, तो जवाब में बड़ी-बड़ी बातें सुनने को मिलेंगी। "देखिए, बिजनेस ग्रोथ के लिए इन्वेस्टमेंट जरूरी है," और यह इन्वेस्टमेंट?—वह भी दूसरों के पैसे से! असल में, ये व्यापारी ...

धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी की निश्रा में धर्म आराधना की धूम

चित्र
लुधियाना में पर्व पर्युषण संपन्न लुधियाना : - श्री आत्मानंद जैन सभा (रजि.) के तत्वावधान में संघ में पर्व पर्युषण की आराधना हर्षोल्लास के साथ हुई।इस संघ में श्री आत्म वल्लभ समुद्र इंद्रदिन्न रत्नाकर सूरीश्वरजी के क्रमिक पट्टधर पंजाब केसरी, गुरु वल्लभ समुदाय के वर्तमान  गच्छाधिपति श्रुतभास्कर, आचार्य श्री विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी म.सा. आदि साधु साध्वीजी की पावन निश्रा में सर्वाधिक तपस्या हुई। मिली जानकारी के अनुसार गुरुदेव की निश्रा में 5 मासक्षमण, 178 अठाई के अलावा 6 मासक्षमण (32 उपवास) 5 पासक्षमण (15 उपवास),178 अठाई  (8/9 उपवास),150/ छ्ट अठ्ठम (तेला) एवं 44 अक्षयनिधी के तपस्वी थे।गुरुदेव ने तप की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला व कहा कि पर्वों का पर्व मतलब पर्वाधिराज पर्युषण।अत्यंत भाग्यशाली हैं वो जिन इन दिनों में तप कर अपने कर्मो को खपाते हैं। पारणा के लाभार्थी बाबू राम चमनलाल किशोर कुमार राजिंद्र  कुमार राकेश कुमार राजेश कुमार  (थड़े वाले परिवार) जैन होजरी लुधियाना ने  संघ की आज्ञा से तपस्वियों के पारणा का लाभ लिया।इस अवसर पर संघ अध्यक्ष राकेश जैन नारोवाल, ...

राष्ट्रभाषा हिंदी और मातृभाषा में शिक्षा समय की मांग :- मुनि श्री अक्षयसागर

चित्र
14 सितंबर, हिन्दी दिवस पर विशेष हिन्दी जन -जन की भाषा  रा ष्ट्रीय हिंदी दिवस का इतिहास 14 सितंबर, 1949 से शुरू होता है। इस दिन, भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि को आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हिंदी दिवस को मनाने के पीछे एक कारण यह है कि देश में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की उपेक्षा को रोकना है। आपको बता दें कि महात्मा गांधी ने हिंदी को जन-जन की भाषा भी कहा था। जॉर्ज ऑखेरू, प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक ने लिखा है- किसी राष्ट्र की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का सुनिश्चित तरीका है , उसकी भाषा को हीन बना देना। जयप्रकाश नारायण ने लिखा था कि- मेरा सुनिश्चित मत है कि विदेशी भाषा अनिवार्य रहते हमारे शिक्षार्थियों में स्वाभिमान का विकास नहीं हो सकता। स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी को अनिवार्य रखना राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतिकूल है। सुप्रसिद्ध पत्रकार और लेखक डॉ वेदप्रताप वैदिक ने अपने एक लेख में लिखा कि- स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी के एकाधिकार शाही को छोड़कर अन्य विदेशी भाषाओं का सम्मान किया होता तो हमारा व्यापार कम से कम दस गुना अधिक होता, द...

220 वर्षों से भी ज्यादा समय से भायंदर का नाईक परिवार निभा रहा अनोखी परंपरा

चित्र
नई गणेश मूर्ति का होता हैं अगले साल विसर्जन भायंदर :- शहर के प्रतिष्ठित नाईक परिवार के घर में गणपति का आगमन तो हर साल होता है, लेकिन पूजा एक साल बाद होती है। भायंदर पश्चिम में स्टेशन रोड पर स्थित चंद्रकांत निवास में नाईक परिवार पिछले 220 साल से यह अनोखी परंपरा निभाता आ रहा है। परिवार के छोटे बेटे एंड सचिन नाईक ने बताया कि हर साल गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की नई मूर्ति लाई जाती है और इसी दिन घर में रखी पुरानी मूर्ति की पूजा शुरू होती है, जो पूरे 10 दिन चलती है और उसका विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन कर दिया जाता है। इसके बाद नई मूर्ति साल भर उसी जगह पर रखी रहती है लेकिन उसकी पूजा नहीं की जाती है। उसकी बगल में दाहिने सूंड वाली सिद्धिविनायक की छोटी सी मूर्ति है, जिसका हर महीने की संकष्टी चतुर्थी को जलाभिषेक किया जाता है। सचिन बताते हैं कि शुरू से ही उनके यहां इको फ्रेंडली (सांडू मिट्टी) की मूर्ति ही आती है और सज्जा लकड़ी की होती है। औरंगाबाद से मुंबई आया था नाईक परिवार दरअसल इस घर के गणेश उत्सव की कहानी ऐतिहासिक व अनूठी है। परिवार के बड़े बेटे योगेश नाईक बताते हैं कि उनके पूर्वज रणछोड़ न...

महाकाल की नगरी उज्जैन में पहलीबार 80 सिद्धितप

चित्र
23 अगस्त से 9 सितम्बर  तक महोत्सव का आयोजन संदेश - पूजा तलेरा को सिद्धितप उज्जैन :- श्री अवंती पार्श्वनाथ भगवान,   श्री श्रेयांशनाथाय भगवान के सानिध्य में व परम पूज्य आचार्य श्री विजय राजेन्द-धनचन्द्र भूपेन्द्र यतीन्द-विद्याचन्द्र-जयन्तसेनसूरि सदगुरुभ्यो के दिव्य आशीष से अवंतिका नगरी की पुण्य भूमि उज्जैन नगर के इतिहास में पहली बार 88 सिद्धितप तपस्वी अमृतमय पारणा के अवसर पर सप्तान्हिका महोत्सव का आयोजन किया गया है।ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उज्जैन नगर धर्ममय हो गया है। श्री सौधर्मवृहत तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ शुध्धोऽहं साध्य वर्षावास समिति नयापुरा, के तत्वावधान में इस अवसर पर 23 अगस्त  से 9 सितम्बर  तक विविध कार्यक्रमों का आयोजन परम पूज्य प्रातः स्मरणीय कलिकाल कल्पतरु दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वर जी म. सा. के पट्टधर परम पूज्य राष्ट्र संत आचार्य देवेश पूण्यसम्राट श्री विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म. सा. के पट्टधर परम पूज्य गच्छाधिपति वर्तमान आचार्य श्री विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म. सा.एवं आचार्य देवेश श्री विजय जयरत्न सूरीश्वरजी म. सा. की आज्ञानुव...

होशपूर्वक जीवन: जैन धर्म की शुद्धता और अहिंसा का मार्ग

चित्र
साधना जैन धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा मुनि महात्मानंद जै न धर्म की परंपराएं और सिद्धांत मानव जीवन को शुद्ध और संयमित बनाने पर केंद्रित हैं। भगवान महावीर ने अहिंसा और शुद्धता के साथ जीवन जीने का मार्ग दिखाया हैं, जिसे जैन धर्मावलंबी प्रतिदिन के जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं। सामायिक-प्रतिक्रमण, जैन साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, वचनों और कर्मों की समीक्षा करता हैं और आत्मा की शुद्धि का प्रयास करता हैं। इस साधना के दौरान, व्यक्ति को हर गतिविधि को होशपूर्वक करने की सलाह दी जाती हैं, यहां तक कि छींकने जैसी स्वाभाविक क्रियाओं को भी नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता हैं। जैन परंपरा में छींक को बेहोशी की निशानी माना जाता हैं, विशेष रूप से प्रतिक्रमण के समय। छींकने के पीछे की प्रक्रिया अनियंत्रित होती हैं, जो ध्यान और जागरूकता की कमी को दर्शाती हैं। जैन साधना में व्यक्ति को हर क्षण होशपूर्वक जीने की प्रेरणा दी जाती हैं ताकि वह अपने कर्मों और विचारों पर पूर्ण नियंत्रण रख सके। इसलिए, प्रतिक्रमण के दौरान छींकने से बचने का उद्देश्य यह हैं कि साधक पूरी तरह से अप...

गुरु राजेंद्र की क्रियोद्धार भूमि तप शूराओ की नगरी जावरा में 240 सिद्धितप

चित्र
धर्ममय हुई जावरा नगरी तपस्वियों का विजय तिलक,वरघोडा एवं पारणा का भव्य आयोजन ओनिष दिलीप पगारिया भी सिद्धितप के तपस्वी जावरा (मध्यप्रदेश) :-  श्री आदिनाथ भगवान, श्री शांतिनाथ भगवान, आचार्य श्री राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सानिध्य में शासन आराधक, शासन प्रेमी, शासन रक्षक 25वें तीर्थंकर तुल्य सकल श्री संघ की परम पावन पुनित सेवा में श्री सौ.वृ.त. त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ एवं आत्मशुद्धि चातुर्मास समिति 2024-जावरा, मध्यप्रदेश के तत्वावधान में पहलीबार 240 सिद्धितप की अद्भुत तपस्या हर्षोल्लास के साथ चल रही हैं। ज्ञात होभारत की चैतन्यमय दिव्यवसुंधरा पर मध्यप्रदेश में गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा.की क्रियोद्धार भूमि जावरा नगर एक व्यापारिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर से सुशोभित है। धन वैभव के साथ ही धर्म वैभव से परिपूर्ण संप आस्थावान एवं सुज्ञ श्रावकों का भण्डार स्थल है। किन्तु जैसा कि प्रत्येक नगर में गाया जाता है कि युवाओं में धर्म के प्रति बढ़ रही सुषुप्ता को जागृति में परिवर्तीत करने के लिए संघ किसी चेतना पुरुष की दीर्घ नाह देख रहा था। संघ के अनुसार यह किसी अभिनव युग के स्वर्णिम इतिहास...

पेशवाओं के 9 वंशज डॉ. उदय सिंह पेशवा को श्रद्धांजलि

चित्र
सफाई अभियान का आयोजन भायंदर :-  उत्तन स्थित जंजीरे धारावी किले में नरवीर चिमाजी अप्पा मेमोरियल के पास, पेशवाओं के 9 वंशज डॉ. उदय सिंह पेशवा को श्रद्धांजलि दी गई।रविवार को आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित मेहमानों ने उनके कार्यों को याद किया।साथ ही उनकी याद में किले पर सफाई अभियान भी चलाया गया।इस अभियान में गढ़प्रेमियों के अलावा, कातकरी समाज के महिला-पुरुष, विधायक गीता जैन और मीरा भायंदर महानगर पालिका के उपायुक्त संजय दोंदे उपस्थित थे।

"विश्व शांति और अहिंसा पर परिसंवाद" का महत्वपूर्ण आयोजन राजभवन कोलकाता में आज

चित्र
राज्यपाल और केंद्रीयमंत्री कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। कोलकाता :- जन आरोग्य फ़ाउंडेशन के संस्थापक भारत गौरव देवेन्द्र ब्रह्मचारीजी के दिशा निर्देशन में तीर्थंकर भगवान महावीर के 2550 निर्वाण के वर्ष के अवसर पर"विश्व शांति और अहिंसा पर परिसंवाद" का महत्वपूर्ण आयोजन राजभवन कोलकाता में आज शाम को किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ सी वी आनंदा बोस और भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले विशिष्ट अतिथि  होंगे। स्वागताध्यक्ष अशोक जैन सेठी और विशेष अतिथि महेंद्र तुरखिया, समाजसेवी एवं उद्योगपति भी उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, सम्मानित अतिथि घेवरचंद बोहरा, मुंबई, दीपक कुमार सेठी, वीरेंद्र कुमार पाटनी, निर्मल बिनायका आदि शामिल होंगे। कार्यक्रम के समन्वयक मनोज जैन (इशिका) ने बताया कि देश विदेश के अतिविशिष्ट साहित्यकार, सिने कलाकार एवम उद्दोगपति तथा भारत के अलग अलग राज्यों के सभी समाजों के शीर्षस्थ महानुभावों के साथ ही सिने कलाकार की भी महत्वपूर्ण और गरिमामय उपस्थिति होगी। कार्यक्रम में सत्य- अहिंसा का उपदे...

आत्मा की शुद्धि के लिए करेंगे तप व जप :- डॉ पुष्पेंद्र

चित्र
  पर्युषण महापर्व  1  सितम्बर से प्रारम्भ 8  सितंबर को  “ मिच्छामि दुक्कड़म् ”  के साथ होंगी पूर्णिहूति जै न धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत ,  तप ,  साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं    के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है   पर्युषण महापर्व।   श्वेतांबर व दिगंबर समुदाय के धर्मावलंबी भाद्रपद मास में  “ पर्युषण महापर्व ”  की साधना - आराधना करते है। श्वेतांबर समुदाय के आठ दिवस को  “ पर्युषण ”  के नाम से जाना जाता है जो कि   दिनांक  1  सितम्बर से प्रारम्भ होंगें तथा  8  सितम्बर को  “ संवत्सरी महापर्व ” ( क्षमापर्व) के दिवस के साथ पूर्ण होगें । वहीं दिगम्बर समुदाय के दस दिवसों को  “ दस लक्षण पर्व ”  के नाम से ज...