राजतचंद्र विजयजी की निश्रा में धर्ममय हुआ झाबुआ नगर

ज्ञान,ध्यान,तप आराधना की मची धूम


झाबुआ (मध्यप्रदेश) :-
परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री  ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब  आदि ठाणा का ज्ञान ध्यान तप जप आराधना से संपन्न मंगलमय चातुर्मास चल रहा है।

ऋषभदेव 52 जिनालय पौषधशाला में निरंतर धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है । श्री गौतम स्वामी सामुहिक इक्कीसा पाठ के पश्चात परम पूज्य मालवरत्न मधुर प्रवचनकार मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी  महाराज साहेब ने सिंदूर प्रकार ग्रंथ के आधार से मानव जीवन की दुर्लभता पर प्रकाश डालते हुए कहा चिंतामणि रत्न जैसा मानव जीवन हम प्रमाद में खो रहे हैं । संसार की मोहदशा में सोए हुए हैं। संसार के प्रपंचो से नींद खुलती नहीं है । ऐसी अवस्था में धर्म वाणीहमें जगाती है । मानव जीवन की दुर्लभता 10 दृष्टांत से शास्त्रों में वर्णित है। चोल्लक दृष्टांत पर मुनिश्री ने सुंदर धाराप्रवाह शैली में कहा

धर्मसभा में उन्होंने कहा कि राजा के मित्र जो राजा पर परोपकारी थे । राजा ने 1 दिन उसे वरदान मांगने को कहा । उसने प्रतिदिन राज दरबार से प्रारंभ होकर पूरे राज्य में भोजन करने की इच्छा जताई । राजा ने कहा तुच्छ वस्तु क्या मांगते हो उत्तम कोटि का मांगो । धन धान्य कोई गांव ऐसा कुछ श्रेष्ठ मांगो जिसे पूरी जिंदगी आरामदायक बीते। उसने जिद पूर्वक कहा मैंने जो मांगा बस वही मुझे दे दो। राजा ने कहा तथास्तु। फिर वह रोज अलग-अलग जगह खाने लगा लेकिन कहीं भी राजभवन जैसा भोजन नहीं मिला। पुनः राज भोजन  की इच्छा हुई किंतु उसे प्राप्त नहीं हुआ उसी तरह मानुष्य जन्म दुर्लभ है।

मुनि श्री ने आगे कहा मौत के बाद साथ में ना आने वाले चीजों के लिए बहुत समय है और मौत के बाद आने वाले धर्म के लिए बिल्कुल समय नहीं है। कैसा ? दुर्भाग्य है । मुनि श्री ने कहा सो काम छोड़कर शरीर का ध्यान देना चाहिए लेकिन हजार काम छोड़कर धर्म ध्यान करना चाहिए। धर्मा वो दीपक है जिससे हम संसार रुपी भव अटवी में भटकने से बच जाते हैं। मनुष्य जीवन को सफल बनाने की कला आनी चाहिए। सबसे मधुर एवं आत्मीयता से व्यवहार करें सबका दिल जीतना चाहिए ।शब्दों को सोच कर बोलना चाहिए शब्द से महाभारत रचना भी हो जाती है। शब्द घाव करते हैं और वही शब्द औषधि भी बनते हैं। भाव से भव कम हो जाते हैं। अच्छी भावना भाकर मानव जीवन का कल्याण करना चाहिए। मुनिश्री जीतचंद्र विजयजी ने सुंदर गीत गाया

आगामी आयोजन

श्रावण सुदी पंचमी को भव्य रुप से 22 वे तीर्थंकर परमात्मा नेमिनाथ प्रभु का जन्म कल्याणक मनाया जाएगा। ठीक प्रातः 9:00 बजे जन्म कल्याणक की शुरुआत होगी । ढाई घंटे तक यह उत्सव मनाया जाएगा ।14 स्वप्न दर्शन ,56 कुमारी गीत एवं पालना जी झुलाने के आयोजन होंगे।नारियल का गोला बधारेंगे एवं केसर छांटना आयोजन होगा।  इस आयोजन का संपूर्ण लाभ मनोहरमलजी छाजेड़ परिवार झाबुआ ने लिया है।

14 अगस्त से नव दिवसीय नवकार महामंत्र की आराधना यशवंत भंडारी परिवार झाबुआ की ओर से होगी।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुभाष कोठारी कोषाध्यक्ष नरेंद्र पगारिया सचिव उत्तम लोढा ने अधिक से अधिक संख्या में पधार कर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।संचालन यशवंत भंडारी ने किया। गौतम स्वामी आरती का लाभ सुभाषजी कोठारी को मिला। चौबीसी का लाभ श्यामूबाई व प्रमिला बेन रुनवाल परिवार वीर गणधर लब्धि तप में सुबह का बियासणा यश कुवर दुग्गड़ की ओर से एवं शाम का मनोज मनोकामना परिवार की ओर से हुआ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पर्युषण महापर्व के प्रथम पांच कर्तव्य।

"ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः के सवा लाख जाप

सभी जीवों का मंगल व विश्व मे शांति हो