गच्छाधिपति धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी का चातुर्मास पालीताणा में

ऐतिहासिक व यादगार बनाने तैयारियां शुरू - आत्म वल्लभ मंडल ने लिया लाभ


सादड़ी (राजस्थान) :-
सादड़ी के जैन धर्मावलंबियों के लिए वर्ष 2026 धर्म आराधना एवं पुण्यकर्म बंधन का एक अपूर्व अवसर लेकर आया है।

परम पूज्य श्री जंबूविजयजी म.सा. के सानिध्य में 45 आगमों के संशोधनकर्ता, श्रुत भास्कर, वर्तमान जैन परंपरा में उँगलियों पर गिने जाने वाले विरले गुरुभगवंत, जो 2500 वर्ष पूर्व की पाली, माधवी, प्राकृत, संस्कृत आदि अनेक भाषाओं के ज्ञाता हैं, ऐसे सरस्वती उपासक, श्रुत ज्ञान मंदिर के संरक्षक तथा पाकिस्तान स्थित गुरु आत्मारामजी के समाधि मंदिर, गुजरांवाला की स्पर्शना करने वाले श्री आत्म वल्लभ समुद्र इंद्र रत्नाकर सूरी पाट समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति श्री धर्म धुरंधर सूरीश्वरजी म.सा. आदि साधु-साध्वी ठाणा 50 का वर्ष 2026 का चातुर्मास पालीताणा तीर्थ पर होगा।

इस आगामी चातुर्मास का लाभ श्री आत्म वल्लभ जैन सेवा मंडल, सादड़ी (राणकपुर) को प्राप्त हुआ है।शाश्वत तीर्थ शत्रुंजय में होने वाले इस चातुर्मास में 500 से अधिक आराधक लाभ ले सकें और  सादड़ी के जैन धर्मावलंबी पर्युषण पर्व के दरम्यान, पालीताणा तीर्थ में आकर आराधना कर सकें, इसके लिए उनके आवास भोजन एव अन्य व्यवस्था मंडल द्वारा अंकीबाई, सादड़ी भवन, हिम्मत विहार, राजेंद्र विहार तथा बी.एस. संघवी धर्मशाला में 240 से अधिक कमरों की व्यवस्था की गई है।

पावन तीर्थभूमि पालीताणा में आराधना कर हम सभी पुण्यार्जन करें, जिन शासन की प्रभावना करें, जिनवाणी का श्रवण कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं तथा सिद्ध क्षेत्र शत्रुंजय के कण-कण में विद्यमान ऊर्जा का अपने जीवन में संचार करें, यही मंडल की भावना है।

सादड़ी के जैन धर्मावलंबियों हेतु चातुर्मास के आवेदन पत्र शीघ्र ही उपलब्ध कराए जाएंगे। जिनका पालीताणा तीर्थभूमि पर यह प्रथम चातुर्मास होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।* आप मंडल के निम्न पदाधिकारियों से संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्ञात हो मंडल देव, गुरु और धर्म की कृपा से मंडल पिछले आठ दशकों से जैन समाज की अविरत सेवा करता रहा है तथा समय, देश, काल और भाव के अनुसार मंडल ने अपनी सेवा के क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार विस्तार किया है जिसमे हमारी जैन परंपरा के सभी वर्गों का इसमें समावेश रहा है। दशकों से चल रहा मंडल का साधार्मिक सेवा कार्यक्रम न केवल निर्विवाद है, बल्कि इससे सादड़ी के हजारों साधार्मिक बंधुओं को संबल प्राप्त हुआ है। 

साधार्मिक बंधुओं की चिकित्सा, जीवन-यापन, आवास, उच्च शिक्षा आदि के लिए दानदाताओं के सहयोग से करोड़ों रुपयों की सहायता प्रदान की गई है, जो निरंतर गतिमान है। मंडल की निःशुल्क SMS सेवा के माध्यम से सादड़ी जैन समाज को एक सूत्र में बाँधने का सफल प्रयास दशकों से निरंतर जारी है। धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था, यात्रा संघों का संचालन, गुरु भगवंतों का चातुर्मास, फेलोशिप ग्रुप टूर, लीडरशिप समिट तथा स्नेह सम्मेलन जैसे विविध कार्यक्रमों का आयोजन मंडल करता आया है और कर रहा है।हमारे जैन समाज के सभी वर्ग, श्वेतांबर मूर्तिपूजक, स्थानकवासी, ओसवाल, पोरवाल, सभी सम्मिलित होकर इन कार्यक्रमों से लाभान्वित हुए हैं, जिस पर मंडल के 1300 से अधिक सदस्यों को गर्व है।



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