पूर्व महाधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा के निधन से विधि जगत में शोक की लहर
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन भी रहे
जयपुर। राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ नरपत मल लोढ़ा का निधन हो गया। उनके निधन से कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार 23 मई को जयपुर के आदर्शनगर स्थित मोक्षधाम में संपन्न हुआ। वे 85 वर्ष के थे। कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री से जुड़े दीपक लोढ़ा और राजेंद्र लोढ़ा उनके बेटे हैं और पोते राहुल लोढ़ा का राजस्थान के विधिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम है। दूसरा पोता साहिल लोढ़ा व्यावसायिक क्षेत्र में सक्रिय है। नरपतमल लोढ़ा अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं। उनकी अंतिम यात्रा जयपुर स्थित सिविल लाइंस आवास से निकाली गई, जिसमें न्यायपालिका, अधिवक्ता समुदाय, प्रशासनिक अधिकारियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। दिवगंत नरपत मल लोढ़ा राजस्थान के सबसे सम्मानित कानूनी व्यक्तित्वों में गिने जाते थे।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं वसुंधरा राजे, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया एवं सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर सहित केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, बीजेपी नेता डॉ सतीश पूनिया, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़, राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, पाली के सांसद पीपी चौधरी, जोधपुर शहर के विधायक पंकज भंसाली सहित कई सांसदों, विधायकों एवं राजनेताओं एवं आरएसएस से संबद्ध लोगों ने नरपतमल लोढ़ा के निधन पर दुख जताया है। वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा, पदम मेहता, अनिल लोढ़ा, एएस सिलावट और ओम सैनी सहित राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार ने नरपत मल लोढ़ा को श्रद्धांजलि दी है। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा ने 5 दशकों से अधिक समय तक विधि क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। जोधपुर में 30 मई 1940 को जन्मे नरपत मल लोढ़ा ने वर्ष 1969 में वकालत शुरू की। वे भारत सरकार के सीनियर स्टेडिंग काउंसिल में भी रहे।
जीवन भर राष्ट्रवाद की विचारधारा से जुड़े रहे नरपत मल लोढ़ा राजस्थान के दो बार महाधिवक्ता रहे तथा संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उनकी विशेष पहचान थी। वर्ष 2011 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। वर्ष 2003-04 और 2015-17 के दौरान बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन भी रहे और अधिवक्ताओं के हितों तथा न्यायिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने शांत, सौम्य और विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व के कारण वे न्यायिक और विधिक क्षेत्र में अत्यंत सम्मानित माने जाते थे। राजस्थान हाईकोर्ट, विभिन्न बार एसोसिएशनों तथा विधि जगत से जुड़े अनेक संगठनों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उनके निधन पर अनेक न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को सदैव स्मरणीय बताया। जोधपुर मूल के नरपत मल लोढ़ा के निधन से राजस्थान ने विधि क्षेत्र का एक अनुभवी, सम्मानित और दूरदर्शी व्यक्तित्व खो दिया है, जिसकी भरपाई करना कठिन होगा। कानूनी क्षेत्र के अलावा श्री लोढ़ा सामाजिक और जनकल्याण गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। वे नारायण सेवा संस्थान, दिव्य लोक विकलांग सेवा संस्थान, रीको तथा राजस्थान की कई अस्पताल और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे।
अपने लंबे विधिक जीवन में उन्होंने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, सेबी, सिडबी और विभिन्न सरकारी और निजी दोनों पक्षों की ओर से कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की और अनेक ऐतिहासिक फैसलों से जुड़े रहे। उनकी गहरी कानूनी समझ, संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता और शांत एवं विनम्र व्यक्तित्व के कारण उन्हें न्यायिक जगत में विशेष सम्मान प्राप्त था।

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