नित्यानंद सूरीश्वरजी की निश्रा में बड़ोदा में जोरदार माहौल में प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई
200 वर्ष से ज्यादा प्राचीन श्री मनमोहन पार्श्वनाथ जिनालय में कार्यक्रम
बड़ौदा :- गुरु वल्लभ की जन्म भूमि बड़ोदरा में वर्तमान वल्लभ सूरीश्वरजी गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी म.सा. का प्रवेश जानी शेरी श्री आत्मानंद जैन उपाश्रय में हुआ । गच्छाधिपति गुरुदेव के सान्निध्य में आज प्रातः पटोलिया पोल के श्री मणिभद्र वीर मंदिर में श्री सरस्वती देवी की प्रतिष्ठा बहुत ही उमंग उल्लास भरे माहौल में सम्पन्न हुई । बहुत बड़ी संख्या में जन समूह सुबह साढ़े साथ बजे उपस्थित हो गया था । श्री आत्मानंद जैन उपाश्रय से चतुर्विध श्रीसंघ के साथ गाजते बाजते सभी श्रद्धालु 200 वर्ष से ज्यादा प्राचीन श्री मनमोहन पार्श्वनाथ जिनालय पहुंचे । वहां पर जिनदर्शन , चैत्यवंदन के बाद परमात्मा के समक्ष अष्ट प्रकारी पूजा आदि की सामग्री प्रतिष्ठा लाभार्थी परिवार द्वारा समर्पित की गई । उसके बाद श्री मणिभद्र वीर के मंदिर में पहुंचे ।
सबसे पहले श्री मणिभद्र देव को सुखड़ी , घेवर और श्रीफल अर्पण करके मंगल प्रार्थना की गई ।उसके बाद मातेश्वरी श्री सरस्वती देवी की मंत्रोच्चार सहित मंगल क्षणों में प्रतिष्ठा हुई । मां को सुंदर वस्त्र आभूषण लाभार्थी परिवार द्वारा अर्पण किए गए । वहां से पुनः बैंड बाजों के साथ जानी शेरी उपाश्रय पधारे । रास्ते में जगह जगह गोहली करके गुरुदेव को अक्षतों से बधाया गया । साध्वी श्री मोक्षरत्ना श्री जी म. की वर्धमान तप की 100 पूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्री संघ को साधारण खाते में विशेष आर्थिक सहयोग देने वालों की तकती का अनावरण मुख्य लाभार्थी कुसुम कोचर की स्मृति में श्री नवरत्न , अजय , पारस कोचर परिवार बीकानेर , कोलकाता , सूरत के द्वारा किया गया ।
सरस्वती देवी की देहरी के निर्माण , मूर्ति भरवाने , विराजमान करने , एक महीने तक रोज माता रानी को नए वस्त्र समर्पित करने और कार्यक्रम के बाद सकल श्रीसंघ की नवकारसी के लाभार्थी श्रीमती चंद्राबेन शांतिलाल छगनलाल शाह परिवार घड़ियाली पोल वालों का और कोचर परिवार का भव्य बहुमान किया गया । प्रतिष्ठा के लाभार्थी परिवार ने गुरुदेव को कांबली ओढ़ाई ।
गच्छाधिपति गुरुदेव ने अपने प्रासंगिक प्रवचन में गुरु आत्म और गुरु वल्लभ के महान उपकारों का वर्णन करते हुए फरमाया कि श्री मणिभद्र वीर मंदिर जो कि 300 वर्ष से अधिक प्राचीन है और सैकड़ों श्रद्धालु जिस स्थान पर आते हैं उसे तीर्थ जैसा स्वरूप देने के लिए जो भी योजना बनेगी उसमें हमारा पूरा सहयोग रहेगा ।
संघ के विकास में हमेशा अग्रणी रहने वाले और मात्र चार दिन में इस प्रतिष्ठा कार्य को सफल बनाने के लिए गुरुदेव ने तीन पीढ़ियों से पाटोलिया पोल के मंदिर की सार संभाल करने वाले संघ प्रमुख अजित भाई झवेरी और उनके नेतृत्व में अब आगे के लिए इस धर्मस्थान को संभालने की जिम्मेदारी वहन करने वाले अतुल भाई (जंबूसर) का विशेष अनुमोदन किया । साथ ही महिपाल भाई , चिरायु भाई , जैमिन भाई ,धर्मेंद्र भाई , अंकित भाई आदि अनेक कार्यकर्ताओं को संघ सेवा में जुटे रहने का आशीर्वाद दिया ।
इस अवसर पर बोडेली संस्था से भी कार्यकर्ता और गुरुभक्त पधारे हुए थे । धरोलिया गांव से भी गुरुभक्त आए हुए थे । दाठा (सौराष्ट्र )के श्री शिरीष भाई मुंबई से पधारे हुए थे । नागौर से स्वर भूषण श्रेयांस सिंघवी ने भी अपने मधुर गीत से गुरु चरणों में हाजिरी लगाई ।
इस अवसर पर श्री विमलनाथ मंदिर महावीर धाम वाघोडिया श्रीसंघ ने साध्वी मोक्षरत्ना श्री जी म. साध्वी नय रत्ना श्री जी म. के चातुर्मास हेतु और जानी शेरी श्रीसंघ ने साध्वी रत्नत्रया श्री जी म. , साध्वी विनम्रता श्री जी म. , साध्वी वचन गुप्ति श्री जी म. के चातुर्मास हेतु विनती की जिसे गुरुदेव ने स्वीकार कर वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु आज्ञा प्रदान की ।
वयोवृद्ध तपस्विनी साध्वी विरागरसा श्रीजी म. के 58 वीं वर्धमान तप की ओली पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुदेव ने उन्हें वासक्षेप प्रदान किया और कांबली अर्पण की । इस अवसर पर साध्वी मोक्ष रत्ना श्री जी म. के 100 वीं ओली पारणा के उपलक्ष्य की स्मृति में हरेश भाई अंकित भाई शाह परिवार द्वारा 51000 की राशि जीव दया में समर्पित की गई ।
इस अवसर पर जानीशेरी श्रीसंघ ने गुरुदेव को कहा कि गुरुदेव आपने गुरु वल्लभ के इस संघ का हमेशा ध्यान रखा है । गुरु आत्म की जन्म भूमि लहरा तीर्थ पंजाब में आपके सान्निध्य में बनने वाले जिन मंदिर के निर्माण में हमारा श्रीसंघ देव द्रव्य में से ग्यारह लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपए की राशि समर्पित करता है ।
100 वर्ष प्राचीन श्री आत्मानंद जैन ज्ञान भंडार हेतु गुरुदेव की प्रेरणा से सात लाख रुपए प्राप्त होने के वचन मिले थे जिसमें से साढ़े चार लाख रुपए पहले प्राप्त हो गए थे आज सभा में शेष ढाई लाख रुपए भी श्रीसंघ को अर्पित किए गए ।

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