गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी का चातुर्मास इंदौर में
मोहनखेड़ा में धर्म-भक्ति का महासंगम,
मोहनखेड़ा :- दादा राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा की समाधि तीर्थ स्थली जयन्तसेन म्यूजियम,मोहनखेड़ा तीर्थ पर चातुर्मास उद्घोषणा पर्व चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर म्यूजियम की पवित्र धरा धर्म, भक्ति और उल्लास से गूंज उठी, जब गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म. सा. के श्रीमुख से चातुर्मास घोषणा महोत्सव भव्यता और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। यह ऐतिहासिक अवसर श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया।
ओलीजी की तपाराधना के अंतिम और अत्यंत पावन चरण में आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न नगरों एवं प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रीसंघ उपस्थित हुए। मोहनखेड़ा, राजगढ़, पारा, झाबुआ, खाचरोद, नागदा, महिदपुर रोड , टांडा, बाग, कुक्षी, सायला, थराद, आहोर, सूरत, विजयवाड़ा, भरतपुर, इंदौर, उज्जैन, अहमदाबाद और डिसा , मुम्बई महानगर , राणापुर,बाग, बडनगर , बैंगलोर, जावरा , मेघनगर धार ,भाटपचलाना ,लाबरिया ,मन्दसौर, जापान सहित अनेक स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विनतियाँ प्रस्तुत कीं।
साधु-साध्वी भगवंतों की तेजस्वी उपस्थिति और गुरु गच्छ परंपरा की गौरवशाली छटा ने पूरे आयोजन को दिव्य स्वरूप प्रदान किया। वातावरण में भक्ति की तरंगें, धर्म की गूंज और गुरु कृपा का प्रकाश हर दिशा में अनुभव किया गया।
इस अवसर पर बड़ावदा में वालीबाई सागरमलजी छाजेड़ परिवार द्वारा निर्मित जिनालय की प्रतिष्ठा हेतु 8 मई का शुभ मुहूर्त भी प्रदान किया गया। साथ ही केबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप को “जैन संघ विभूषण” की उपाधि से सम्मानित कर धर्मसमाज ने गौरव का अनुभव किया।
सभी संघों की विनतियों को सुनने के पश्चात गच्छाधिपति ने इंदौर श्रीसंघ को चातुर्मास हेतु स्वीकृति प्रदान की। इस घोषणा के साथ ही पूरा परिसर ढोल-धमाकों, रंग-गुलाल और उल्लासमय जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु नृत्य और आनंद में झूम उठे तथा भक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया।
गुरु पद पूजा एवं काम्बली का पुण्य लाभ विजयवाड़ा के विजय गोवाणी एवं श्रीसंघ द्वारा प्राप्त किया गया। संगीतमय भक्ति प्रस्तुति से संगीतकार दीपक करणपुरिया ने सभी को भावविभोर कर दिया, वहीं कार्यक्रम का संचालन मोहित तातेड ने प्रभावी ढंग से किया।
महोत्सव के दौरान ओलीजी आराधना के लाभार्थी हंजाबाई वरदीचंदजी तातेड परिवार का विशेष बहुमान किया गया। यह सम्मान उनके तप, सेवा और धर्मनिष्ठा के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक रहा।
पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि चातुर्मास केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संयम और साधना का दिव्य निमंत्रण है। मोहनखेड़ा की यह ऐतिहासिक घड़ी धर्मसमाज के लिए युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगी। यह जानकारी परिषद के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने दी गयी ।

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