आत्मा और शरीर को कुंदन बनाने वाली नौ दिवसीय पावन साधना आयंबिल ओली !
25 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक रहेगी आयंबिल ओली! By Rupal Chordiya जल्दी से अपना मन बना लीजिये और जुड़िये इस महापर्व से भा रतीय संस्कृति में चैत्र मास का आगमन केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का पर्व लेकर आता है। जैन धर्म की महान परंपरा में ‘नवपद आयंबिल ओली’ एक ऐसी ही साधना है, जो तन को तपाकर मन को कुंदन बनाने की शक्ति रखती है। स्वाद पर विजय – क्या है यह अनोखा त्याग? आयंबिल ओली मात्र एक उपवास नहीं, बल्कि जीभ के स्वाद पर विजय और इंद्रियों पर नियंत्रण का उत्सव है। नौ दिनों तक चलने वाली इस तपस्या में साधक केवल एक बार भोजन ग्रहण करते हैं—वह भी पूरी तरह से सादा, बिना किसी रस के। इस साधना के दौरान दूध, दही, घी, तेल, नमक, गुड़-शक्कर, फल, हरी सब्जि और मसालों (मिर्च-मसाले आदि) का पूर्ण त्याग किया जाता है। यहां तक कि पानी भी केवल उबला हुआ या धोवन पानी ही उपयोग में लिया जाता है, वो भी सूर्यास्त तक ही लिया जाता है। कोई नमक डालकर आहार करते हैं, कोई बिना नमक का करते हैं तो कोई एक धान का ही करते हैं, अर्थात हर दिन एक ही धान्य, जैसे चावल, गेहूं, ज्वारी ऐसे अलग-अलग एक धान्य ही लगाक...