चारित्ररत्न विजयजी की निश्रा में धर्म आराधना की धूम
जैनेतर समाज की विनंती पर मोरीला गांव में कार्यक्रम
थराद :- उत्तर गुजरात में चार महीनों से अधिक समय में 920 किलोमीटर का सतत विहार करके पुण्य सम्राटश्री के शिष्य श्री चारित्र रत्न विजयजी तथा श्री अजीतसेन विजयजी की निश्रा में शासन प्रभावना की,धूम मची थी।उनके द्वारा किये कार्यों ने अनेक जगहों पर इतिहास बनाया।
नेनावा में जीवदया में नव करोड़ एकत्रित
पुण्य सम्राटश्री के शिष्य यानी गुरु के पदचिन्हों पर चलने वाले। आराम का नाम नहीं। हाल ही में फाल्गुन वद पंचमी के दिन लवाणा में मोरखिया गुणवन्तीबेन प्रवीणचन्द्र मफतलाल रीखवचन्द्र परिवार ने श्री आदिनाथ भगवान की भव्यातिभव्य सालगिरह की उजवणी की। श्री आनंद विजयजी म.सा.आदि महात्माओं की प्रवेश यात्रा हुई।मार्च महीने के हिसाब से गर्मी भी अधिक थी, लेकिन जैसे ही प्रवेश यात्रा पूर्ण हुई चारित्र रत्न विजयजी तथा श्री अजीतसेन विजयजी ने धूप में लाखणी की ओर विहार कर दिया, क्योंकि लाखणी में भी मंदिर की सालगिरह थी।इन महात्माओं ने श्री शंखेश्वर तीर्थ में चातुर्मास संपन्न करके कार्तिक सुद पूर्णिमा के दिन विहार किया था। उसके बाद आज तक इस प्रकार विचरण और शासन प्रभावना की है।
थराद में मोटा महावीर की 3, + देरी की 24 + सरस्वती देवी और श्री माणिभद्रवीर की देरी की कुल 29 तथा वरखड़ी धाम की 30 वीं ध्वजा में निश्रा,श्री मुनिसुव्रत स्वामी और पुण्य सम्राट श्री की सालगिरह,डीसां गुरू मन्दिर सालगिरह, इसके अलावा लवाणा लाखणी, वासणा, उंदराणा, पिलुड़ा, नारोली, नेनावा आदि में सालगिरह में निश्रा।मुमुक्षु लकीबेन और खुशीबेन की दीक्षा निमित्त की शोभायात्रा में लवाणा और डीसां में निश्रा प्रदान की। नेनावा में श्री श्रेयांसनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव, तथा नेनावा वासीयों के स्नेह मिलन कार्यक्रम में आपकी उपस्थिति में जीवदया के लिये 09 करोड़ रुपये एकत्रित हुए।
जैनैतर समाज की विनंती से मोरीला गांव में पधारे
लवाणा गांव में मोरखिया भीखालाल जेशींग परिवार आयोजित एक दिवसीय जिनेन्द्र भक्ति महोत्सव में निश्रा प्रदान की यंहा पर स्वामी वात्सल्य भी हुआ। इस महोत्सव के अंतर्गत लवाणा में अंबाजी के विशाल प्रांगण में 36 कोम को आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए चारित्र रत्न विजयजी ने बहुत ही महत्वपूर्ण उपदेश में कहा कि जैन तो बड़े भाग देशावर रहते हैं, ऐसे संजोगों में गांव वासियों की जिनालय, उपाश्रय आदि की सुरक्षा की जिम्मेदारी है! और वह अच्छी तरह से निभाते हैं।
अनेक लोगों को व्यसन मुक्त किया।
श्री शंखेश्वर तीर्थ में पुनः पधारमणी, और गेला निवासी मातृश्री मोंघीबेन जयन्तीलाल मोहनलाल वोहेरा परिवार आयोजित सामुहिक अठ्ठम तप आयोजन हुआ।
गुरु भगवंतों से मिलन
शंखेश्वर तीर्थ में श्री उदय वल्लभ सूरीश्वरजी म.सा., श्री लब्धि वल्लभ सूरीश्वरजी म.सा., श्री शीलचन्द्र सूरीश्वरजीम.सा., श्री रत्नचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा., श्री उदय रत्न सूरीश्वरजी म.सा., आदि श्रमण भगवंतों से मुलाकात के दौरान अनेक मुद्दों पर चर्चा विचारणा हुई।
पाटण में पुण्य सम्राटश्री के पाटोत्सव की उजवणी।
भिलड़ियाजी तीर्थ में 600 श्री अधिक पंडितवर्यों के स्नेह मिलन में निश्रा। यहाँ उल्लेखनीय है कि, 42 वर्षों से तत्वज्ञान परिषद द्वारा यह आयोजन होता है, इसमें पहली बार त्रिस्तुतिक महात्मा की उपस्थिति थी।गुरु जन्मभूमि पेपराल तीर्थ में पुण्य सम्राट श्री के गुरु मन्दिर का भूमि पूजन और उसके बाद शिलान्यास हुआ।वाव थराद जिले के एस. पी, कलेक्टर आदि अधिकारियों का वंदनार्थ आगमन। इसमें भी थराद वाव जिले के कलेक्टर जी एस प्रजापति तो वरखड़ी धाम में 40 मिनट बैठे थे।गुरुदेव से मोटा महावीर की महिमा का वर्णन सुन जिलाधिकारी दूसरे दिन मोटा महावीर के दर्शनार्थ पधारे।
इस विहार यात्रा में सनातन धर्म के संत जैसे कि नेनावा के श्री शिवपुरीजी, करबुण के श्री नागरवंजी तथा भापी के महंतश्री अंकित पुरीजी के साथ प्रेम पूर्वक की मुलाकात हुई।गुजरात के विभिन्न दरबारों के साथ धार्मिक वार्तालाप हुआ।थराद दरबार के अर्जुनसिंह वाघेला, वाव दरबार के गजेन्द्र सिंह, दियोदर दरबार के मानसिंहजी तथा लक्ष्मणसिंहजी, नेनावा दरबार के माधुसिंहजी, करबुण दरबार के जब्बरसिंहजी तथा जिलुभा चौहान के अलावा इस सिवाय भी अनेक दरबारों के साथ मुलाकात हुई। करबुण में तो दरबारों ने अपने घर पगला करवाकर व्यसन मुक्ति की प्रतिज्ञाएं लीं। इस प्रकार उत्तर गुजरात में विचरण करके धर्म धजा फरका वाने वाले और अब मोहनखेड़ा तीर्थ की ओर विहार रत ऐसे श्रमण भगवान के चरणों में वंदना।

Mathth en vandami gurudev.
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